पाकिस्तान के लाहौर हाई कोर्ट ने बुधवार को याचिका सुनी। एक भारतीय नागरिक ने सरबजीत कौर के निकाह को चुनौती दी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सरबजीत अब भी उनकी पत्नी हैं। उन्होंने अदालत से पाकिस्तानी नागरिक नासिर संग निकाह रद्द करने को कहा। न्यायालय ने प्रारंभिक आपत्तियों पर वकीलों की दलीलें ध्यान से सुनीं। अदालत ने संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों की प्रतियां पेश करने का निर्देश दिया।
सरबजीत कौर 2025 में धार्मिक वीज़ा लेकर पाकिस्तान आई थीं। उन्होंने शेखूपुरा में इस्लाम स्वीकार कर नासिर हुसैन से शादी की। उन्होंने अपना नाम बदलकर नूर फ़ातिमा रख लिया था। वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी वह पाकिस्तान में रहीं। प्रशासन ने उन्हें हिरासत में लेकर शेल्टर होम भेज दिया। बाद में अधिकारियों ने उन्हें पति के घर जाने की अनुमति दी।
लाहौर हाईकोर्ट में पहली शादी का दावा और निकाह रद्द करने की मांग
करनैल सिंह ने वकील अली चंगेज़ी संधू के माध्यम से याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि पहली शादी कानूनी रूप से अब भी कायम है। उन्होंने पाकिस्तान के फ़ॉरेनर्स एक्ट उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पत्नी को देश से बाहर भेजने की मांग भी की। अदालत ने पावर ऑफ अटॉर्नी प्रमाणीकरण पर सवाल उठाए। वकीलों ने कहा कि विदेशी नागरिकों पर कानून स्पष्ट नहीं है।
सरबजीत ने मीडिया से कहा कि वह नासिर से प्रेम करती हैं। उन्होंने बताया कि दोनों आठ वर्षों से संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि वह अपनी शेष जिंदगी पाकिस्तान में बिताना चाहती हैं। उन्होंने भारत लौटने से अंतिम समय पर इनकार कर दिया। सरकार ने उनकी मानवीय अपील पर विचार करने की बात कही। राज्यमंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि मामला संवेदनशील है।
पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख ने आपत्ति जताई। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक वीज़ा के दुरुपयोग का आरोप सार्वजनिक रूप से लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार वीज़ा अवधि नहीं बढ़ा सकती। वहीं पुलिस ने सभी उत्पीड़न आरोपों को सिरे से खारिज किया। इस बीच अदालत ने पंजाब पुलिस को सरबजीत को परेशान करने से रोका। अंततः न्यायालय ने अगली सुनवाई दो मार्च 2026 तक स्थगित की।


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