पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध की आशंकाओं के बीच भारतीय रुपये अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में है और शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत में यह नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन की शुरुआत में रुपया 12 पैसे टूटकर 92.37 प्रति डॉलर तक गिर गया, जबकि भारतीय केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India (आरबीआई) ने बाजार को स्थिर रखने के प्रयास किए। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Forex Market) में रुपया 92.33 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ ही देर में गिरकर 92.37 तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 12 पैसे की कमजोरी को दर्शाता है। इससे पहले गुरुवार को भी रुपये में गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन कारोबार के दौरान यह 92.36 प्रति डॉलर तक फिसल गया था और अंत में 24 पैसे टूटकर 92.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
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रुपये पर दबाव के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा कुछ अन्य कारक भी भारतीय मुद्रा को प्रभावित कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती
- विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
- घरेलू शेयर बाजार में गिरावट
इस दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला US Dollar Index 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर पहुंच गया।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
भू-राजनीतिक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी पड़ा। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 560.06 अंक यानी 0.74 प्रतिशत गिरकर 75,474.36 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 184.45 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,454.70 पर कारोबार करता दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। Brent Crude का भाव 4.99 प्रतिशत बढ़कर 96.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार से 7,049.87 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव और बढ़ गया।
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