ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे की ओर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की कोशिश की। इस कदम को मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के विस्तार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और हमले को असफल माना गया। यह पहली बार बताया जा रहा है कि इस तरह की लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग किया गया। वहीं ईरान ने अब तक आधिकारिक रूप से इस कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दागी गई मिसाइलों में से एक उड़ान के दौरान ही विफल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत ने रास्ते में ही मार गिराया। इस घटना के बाद विशेषज्ञ ईरान की मिसाइल क्षमता और उसकी वास्तविक मारक दूरी का नया आकलन कर रहे हैं। चागोस द्वीपसमूह, जहां डिएगो गार्सिया स्थित है, ईरान से करीब 3,800 किलोमीटर दूर है, जिससे यह सवाल उठता है कि ईरान अपनी पुरानी सीमा से आगे बढ़ चुका है या नहीं।
इसराइल डिफेंस फोर्स ने दावा किया कि ईरान ने 4,000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जिससे यूरोप के कई शहर खतरे के दायरे में आ सकते हैं। सेना प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि बर्लिन, पेरिस और रोम जैसे शहर संभावित जोखिम में हैं। हालांकि ब्रिटेन के एक मंत्री ने इस दावे पर संदेह जताया और कहा कि अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि ईरान के पास इतनी लंबी दूरी की क्षमता मौजूद है।
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ईरान की मिसाइल क्षमता पर नए सवाल
अब तक ईरान अपनी मिसाइलों की सीमा करीब 2,000 किलोमीटर तक बताता रहा है, जिससे यूरोप उसकी पहुंच से बाहर माना जाता था। लेकिन हाल के घटनाक्रम और दावों ने यह संकेत दिया है कि ईरान ने इस सीमा को बदल दिया हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के जरिए ऐसी तकनीक विकसित कर चुका है, जिससे वह और लंबी दूरी की मिसाइलें बना सकता है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यह कदम केवल सैन्य हमला नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश हो सकता है। ईरान शायद अपनी ताकत और जवाबी क्षमता दिखाकर विरोधियों को चेतावनी देना चाहता है। साथ ही, यह भी सवाल बना हुआ है कि क्या ईरान इतनी लंबी दूरी पर मिसाइलों को सटीक रूप से नियंत्रित करने की तकनीक हासिल कर चुका है या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और युद्ध के दायरे के विस्तार की आशंका को मजबूत किया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावे और प्रतिक्रियाएं राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकती हैं। ऐसे में आने वाले समय में ईरान की वास्तविक सैन्य क्षमता और उसके इरादों को लेकर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।
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