प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया UAE यात्रा ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया गंभीर अस्थिरता से गुजर रहा है। गाजा संघर्ष, लाल सागर में सुरक्षा चुनौतियां और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा और व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने अपने रिश्तों को पारंपरिक तेल और प्रवासी-आधारित संबंधों से आगे बढ़ाकर रणनीतिक साझेदारी का रूप देने का संकेत दिया। अब दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, समुद्री उद्योग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और निवेश जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग पर काम कर रहे हैं।
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ऊर्जा, रक्षा और AI में भारत-UAE की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है
इस साझेदारी की बुनियाद व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) ने तैयार की, जिसने दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है और इसी कारण UAE के साथ तेल भंडारण और गैस सुरक्षा से जुड़े समझौते अहम बन गए हैं। फुजैरा में तेल भंडारण व्यवस्था और भारत में रणनीतिक गैस भंडार विकसित करने की योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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दोनों देशों ने समुद्री और औद्योगिक सहयोग को भी नई दिशा दी है। गुजरात में जहाज मरम्मत केंद्र विकसित करने, डिजिटल व्यापार गलियारा बनाने और बंदरगाह नेटवर्क को मजबूत करने के प्रयास भारत की समुद्री क्षमता को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हैं। रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा और समुद्री समन्वय पर हुए समझौते यह दिखाते हैं कि भारत और UAE बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के बीच अधिक सामरिक तालमेल चाहते हैं।
तकनीक और निवेश के क्षेत्र में भी यह संबंध तेजी से आगे बढ़ रहा है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सुपरकंप्यूटिंग, क्लाउड सिस्टम और बड़े निवेश समझौतों के जरिए दोनों देश खुद को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-UAE संबंध अब केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलते दिखाई दे रहे हैं।
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