रूस ने कहा कि भारत ऊर्जा सहयोग पर अपना रुख बदलने की कोई वजह नहीं देखता। मारिया ज़ाखारोवा ने व्यापार को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि सहयोग वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता लाता है। रूस ने भारत के साथ साझेदारी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
रूस ने कहा कि तेल खरीद पर फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं। पेस्कोव ने माना कि तेल आयात कई देशों से किया जाता है। उन्होंने आपूर्तिकर्ता बदलने की चर्चा को सामान्य प्रक्रिया बताया। रूस ने इस बदलाव में कोई असामान्यता नहीं देखी।
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भारत–रूस ऊर्जा सहयोग पर बरकरार संतुलन
अमेरिका ने दावा किया कि भारत रूस से तेल आयात बंद करेगा। भारत ने इस दावे को न स्वीकार किया, न सार्वजनिक रूप से खारिज किया। पीयूष गोयल ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता को रणनीति बताया। भारत ने बाजार परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की बात कही।
विशेषज्ञों ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल तेल व्यापार पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने 2022 से पहले सीमित तेल आयात का उदाहरण दिया। दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से सामरिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। देश ने अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलन बनाकर नीति अपनाई है।
भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार ऊर्जा क्षेत्र पर काफी निर्भर रहा है। रूस से तेल आयात ने व्यापार को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया। तेल आयात घटने से कुल व्यापार में बड़ी गिरावट आ सकती है। फिर भी दोनों देश दीर्घकालिक सहयोग बनाए रखने पर ज़ोर देते हैं।
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