Zuko Godlimpi ने सोमवार (9 मार्च, 2026) को कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में भारत ने अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन अब वही व्यवस्था कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। उन्होंने प्रिटोरिया में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में बनेगा प्रमुख भागीदार: जुको गोडलिम्पी
गोडलिम्पी ने भारतीय उच्चायोग और II-India Business Forum की ओर से आयोजित दूसरे वार्षिक भारत–दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्मेलन में कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो वर्ष बाद स्वतंत्र भारत का उदय उस वैश्विक व्यापार व्यवस्था के बीच हुआ था, जिसे मुख्य रूप से पश्चिमी देशों ने आकार दिया था। उन्होंने कहा कि प्रमुख शक्तियों द्वारा तय की जा रही विश्व व्यवस्था में एक उभरते हुए लोकतंत्र के रूप में सामने आया। भारत के 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।
गोडलिम्पी ने कहा कि भविष्य में भारत केवल मौजूदा वैश्विक व्यवस्था का पालन करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सह-निर्माता के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। उनके अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की व्यवस्था में भारत सहायक भागीदार के रूप में उभरा था, लेकिन अब परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि उसे उस व्यवस्था के पुनर्निर्माण में प्रमुख भूमिका निभानी पड़ेगी, क्योंकि मौजूदा ढांचा कमजोर होता नजर आ रहा है।
Also Read:अमेरिका ने भारत-चीन पर जांच शुरू की नए टैरिफ़ संभव
ग्लोबल साउथ के हितों की मजबूत पैरवी करते हैं भारत-दक्षिण अफ्रीका
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। गोडलिम्पी के अनुसार दोनों देश विकास, औद्योगिकीकरण और वैश्विक आर्थिक सुधार के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदार हैं। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि World Trade Organization में कई बार भारत और दक्षिण अफ्रीका को “टेरिबल ट्विन्स” कहा जाता है, क्योंकि दोनों देश ग्लोबल साउथ के हितों की मजबूती से पैरवी करते हैं। गोडलिम्पी ने कहा कि वैश्विक विकास से जुड़े मुद्दों पर भारत और दक्षिण अफ्रीका लगातार ऐसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार ढांचे की वकालत करते हैं, जो निष्पक्ष और न्यायसंगत हो। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि विकासशील देशों के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से सुना जाना चाहिए, जितना कि आर्थिक रूप से शक्तिशाली देशों के विचारों को।
Also Read:ईरानी महिला फुटबॉल टीम की दो और सदस्य ऑस्ट्रेलिया में शरण मिली


More Stories
पाकिस्तान में भीषण मुठभेड़, 14 आतंकियों ढेर; मुमताज इम्ती भी मारा गया
Property Row Erupts as BJP Targets Abhishek Banerjee, TMC Calls Claims False
Thailand scraps 60-day free visa policy, Indians affected