अमेरिका ने हाल के महीनों में भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीद कम करने के लिए दबाव डाला था। इसी बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत को सीमित समय के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि भारतीय रिफाइनरियों ने पहले अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करते हुए रूसी तेल की खरीद कम की। उनके मुताबिक भारत को अब अस्थायी राहत इसलिए दी गई है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कमी को कुछ हद तक कम किया जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ अन्य रूसी तेल प्रतिबंधों में भी ढील दी जा सकती है।
बेसेंट ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारतीय रिफाइनरियों को दी गई यह 30 दिन की छूट समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण दी गई है। उनका कहना था कि इस राहत से रूस की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा फायदा नहीं होगा। इससे पहले अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगा दिया था। इसमें रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल था। अमेरिकी प्रशासन का तर्क था कि रूस से तेल खरीदकर भारत अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक मदद दे रहा है।
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रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की छूट, क्या कहते हैं आंकड़े।
इन टैरिफ़ के बाद भारत ने धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करना शुरू कर दिया। बाद में फरवरी में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के मसौदे पर सहमति बनने के बाद टैरिफ़ कम कर दिए गए। इसके साथ अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी हटा दिया गया। अमेरिका का कहना था कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे भारत के लिए अमेरिकी तेल खरीदना भी अपेक्षाकृत आसान हो गया।
आँकड़ों के अनुसार रूस पहले भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता नहीं था। जनवरी 2022 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 1.8 प्रतिशत थी। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने रियायती दरों पर तेल बेचना शुरू किया, जिससे भारत ने वहां से आयात बढ़ा दिया। जुलाई 2024 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 44.6 प्रतिशत तक पहुंच गई। हालांकि 2025 के अंत से यह हिस्सेदारी फिर धीरे-धीरे कम होने लगी।
नवंबर 2025 में भारत के तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में घटकर 24.9 प्रतिशत रह गई। जनवरी 2026 में यह और गिरकर लगभग 20.6 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तरों में से एक है। इसी दौरान भारत ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से तेल बढ़ा दी। जनवरी 2026 में भारत के आयात में सऊदी अरब की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई, जबकि यूएई की हिस्सेदारी भी बढ़कर लगभग 9.3 प्रतिशत तक पहुंच गई।
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