भारत और ईयू यूरोपियन यूनियन के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर अमेरिका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस संदर्भ में, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप अपने ही खिलाफ चल रही लड़ाई को फंड कर रहे हैं। इस टिप्पणी से वैश्विक व्यापार समीकरणों में हलचल बढ़ गई है। इसी बीच, यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा भारत पहुंचे।
अमेरिका से तनाव के बीच भारत और यूरोप ने तेज़ किए रणनीतिक रिश्ते
उनके साथ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहीं। दोनों नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने। इसलिए, इनका चयन भारत की बदलती कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। भारत अब यूरोप सहित अन्य क्षेत्रों से रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। इसके अलावा, यह संकेत भी मिलता है कि भारत अपने व्यापारिक साझेदारों का दायरा बढ़ा रहा है। नतीजतन, अमेरिका के साथ चल रहा तनाव और स्पष्ट होता जा रहा है। इसी क्रम में, भारत और यूरोपियन यूनियन 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा करने वाले हैं। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत दोनों पक्ष व्यापार बाधाएं कम करते हैं। इसके साथ ही, वे एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच आसान बनाते हैं।
भारत-ईयू व्यापार समझौते पर अमेरिका की नाराज़गी खुलकर सामने आई
यह समझौता ऐसे समय सामने आ रहा है जब भारत और यूरोप दोनों अमेरिका से असहज हैं। हाल के महीनों में व्यापार मुद्दों पर मतभेद तेज हुए हैं। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी थी। उन्होंने ग्रीनलैंड मामले पर विरोध के चलते ट्रेड वॉर की धमकी दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपना रुख नरम किया। फिर भी, अनिश्चितता बनी रही। इसलिए, भारत और ईयू नए व्यापारिक विकल्प तलाश रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह डील वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, इससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
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