अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने ईरान युद्ध के बाद पहली बार संसद में डेमोक्रेटिक सांसदों का सामना किया। लगभग छह घंटे चली सुनवाई में उन्होंने शपथ के तहत कई तीखे सवालों के जवाब दिए। इस दौरान उनका सांसदों के साथ कई बार सीधा टकराव भी हुआ। वह हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने पेश हुए, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे। सुनवाई की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक सांसदों ने युद्ध में संघीय धन के इस्तेमाल पर कड़े सवाल उठाए। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका अब तक इस संघर्ष पर लगभग 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर खर्च हथियारों और सैन्य उपकरणों को बदलने में गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि कुल लागत का अंतिम आकलन अभी बाकी है। इस मुद्दे ने पूरे सत्र में प्रमुख स्थान बनाए रखा।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनने के बावजूद युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी बीच व्हाइट हाउस ने रक्षा बजट बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की मांग रखी है। इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सैन्य खर्च में सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। हेगसेथ ने कहा कि यह प्रस्ताव मौजूदा हालात की गंभीरता को दर्शाता है। वहीं सैन्य नेतृत्व ने इसे भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी निवेश बताया।
Also Read: 167 गेंदों में 400 रन, गेंदबाज बेहाल… वैभव सूर्यवंशी ने IPL रिकॉर्ड्स में मचाई हलचल
संसद में रक्षा मंत्री पर सवाल
डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस सैन्य कार्रवाई को “वॉर ऑफ चॉइस” बताते हुए सरकार को घेरा। कैलिफ़ोर्निया के सांसदों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जनता से युद्ध को लेकर सही जानकारी नहीं दी। Donald Trump पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि वह मध्य-पूर्व में एक और संघर्ष में फंस रहे हैं। इस पर हेगसेथ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और आरोपों को लापरवाह बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के कारण स्थिति को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान कई रिपब्लिकन सांसदों ने पेंटागन का समर्थन किया और ईरान से खतरे को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मिल रही धमकियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस बीच एक हवाई हमले में नागरिकों की मौत का मुद्दा भी उठा, जिस पर जवाबदेही की मांग की गई। अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच जारी है और निष्कर्ष आने बाकी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने युद्ध के नैतिक और रणनीतिक पहलुओं पर बहस को और तेज कर दिया।
सत्र के अंत में युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई, खासकर तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई पर इसके असर को लेकर। कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति की नीतियों और निर्णय क्षमता पर भी सवाल उठाए, जिससे माहौल और गरमा गया। हेगसेथ ने इन आलोचनाओं का तीखा जवाब दिया और अपने रुख पर कायम रहे। उन्होंने संकेत दिया कि आगे भी इस मुद्दे पर बहस जारी रहेगी। वह अगली सुनवाई में सीनेट के सामने पेश होने वाले हैं, जहां और सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
Also Read: शक्तिमान रोल पर छिड़ी बहस, मुकेश खन्ना बोले- रणवीर में दिखती है नेगेटिविटी


More Stories
भारत बना ‘राइस किंग’, चीन को पछाड़ा
Oil jumps as Trump reviews Iran options
Rajasthan: 5 Dead in Expressway Car Fire