पुराने तरीकों से कैसे खाली हो गए डिजिटल वॉलेट
क्रिप्टो फ्रॉड आम चोरी से कहीं ज़्यादा तकलीफ़देह होती है, क्योंकि ब्लॉकचेन पर हर लेन-देन सार्वजनिक रूप से दिखता है, लेकिन पीड़ित उसे रोक नहीं सकता। ब्रिटेन की रहने वाली हेलेन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हैकर्स ने उनके और उनके पति रिचर्ड के कार्डानो क्रिप्टो वॉलेट से लगभग 3.15 लाख डॉलर उड़ा लिए। हेलेन आज भी ब्लॉकचेन पर देख सकती हैं कि उनका पैसा एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में घूम रहा है, लेकिन उसे वापस लाने का कोई रास्ता नहीं है।
इस दंपती ने सात साल तक धीरे-धीरे निवेश किया था। वे जानते थे कि क्रिप्टो में जोखिम होता है, लेकिन उन्होंने अपनी डिजिटल चाबियों को सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश की। फिर भी अपराधी उनके क्लाउड स्टोरेज अकाउंट तक पहुंच गए, जहां वॉलेट से जुड़ा संवेदनशील डेटा रखा गया था। फरवरी 2024 में, एक छोटे टेस्ट ट्रांसफर के बाद, हैकर्स ने पलक झपकते ही सारे कॉइन्स अपने खातों में भेज दिए।
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क्रिप्टो अपराध में तेज़ उछाल और आम निवेशक निशाने पर
जैसे-जैसे दुनिया में क्रिप्टो अपनाने वालों की संख्या बढ़ी है, वैसे-वैसे अपराध भी बढ़े हैं। अनुमान है कि 2025 में व्यक्तिगत निवेशकों से जुड़ी क्रिप्टो चोरी करीब 71 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई। साइबर अपराधी अब बड़े एक्सचेंजों की बजाय आम निवेशकों को आसान निशाना मानते हैं।
हैकर्स चोरी किए गए डेटाबेस, सोशल इंजीनियरिंग और फिशिंग जैसे पुराने हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई मामलों में अपराधी ऑनलाइन ठगी से आगे बढ़कर शारीरिक हिंसा तक उतर आए हैं, जिसे ‘रेंच अटैक’ कहा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक चोरी की गई क्रिप्टो को ठिकाने लगाने के रास्ते खुले हैं, तब तक ऐसे अपराध बढ़ते रहेंगे।
यह हकीकत साफ़ करती है कि क्रिप्टो में ‘अपना खुद का बैंक’ बनने की आज़ादी जितनी आकर्षक है, उतनी ही ख़तरनाक भी।
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