सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा अचानक रुकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने देशभर में ई-रिक्शा चालकों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में सामने आए वीडियो के बाद पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने एक 18 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर वीडियो बनाने के लिए रिक्शा चालकों को परेशान किया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी एक मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी BMS को नियंत्रित करता था। यह तकनीक ब्लूटूथ कनेक्शन के जरिए बैटरी की पावर सप्लाई बंद कर देती थी।
मोबाइल ऐप से रुक रहे ई-रिक्शा, सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
जांच में सामने आया कि ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाला BAT-BMS ऐप एक चीनी कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने विकसित किया था। यह ऐप लिथियम बैटरी की निगरानी और कंट्रोल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अधिकतर ई-रिक्शा चालकों को इस ऐप और इसकी सुरक्षा कमजोरियों के बारे में जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप में मजबूत पासवर्ड सुरक्षा और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। इसी कमी का फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति ब्लूटूथ के जरिए नजदीकी ई-रिक्शा के सिस्टम तक पहुंच सकता था। इसके बाद बैटरी की पावर सप्लाई ऑन या ऑफ करके रिक्शा को अचानक रोका जा सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं यात्रियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।
BAT-BMS ऐप मूल रूप से बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की निगरानी और संचालन के लिए बनाया गया था। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को लिथियम बैटरी का कंट्रोल सेंटर माना जाता है, जो बैटरी की पूरी गतिविधि मॉनिटर करता है। इस सिस्टम के जरिए बैटरी का वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग स्टेटस और करंट फ्लो लगातार ट्रैक किया जाता है। इसमें ब्लूटूथ लो एनर्जी यानी BLE मॉड्यूल लगा होता है, जिससे मोबाइल ऐप बैटरी से कनेक्ट होता है। ड्राइवर, डीलर और निर्माता इस तकनीक का उपयोग बैटरी की स्थिति जानने के लिए करते हैं। प्रत्येक बैटरी सिस्टम में एक यूनिक आईडी लिंक होता है, जो डेटा को मोबाइल स्क्रीन पर दिखाता है। यदि कोई व्यक्ति ब्लूटूथ रेंज में पहुंच जाए, तो वह सिस्टम से कनेक्ट होकर बैटरी कंट्रोल कर सकता है।
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BMS सिस्टम की कमजोरी से सोलर ग्रिड पर भी मंडरा सकता है खतरा
विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों ने ई-रिक्शा चालकों को BMS सिस्टम तुरंत सुरक्षित करने की सलाह दी है। तकनीकी जानकारों के अनुसार, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को यूजरनेम और मजबूत पासवर्ड से लॉक किया जा सकता है। हालांकि, अधिकांश चालकों को इसकी जानकारी नहीं दी गई और कई डीलरों ने भी उचित प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं कराया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जैसे लोग अपने स्मार्टफोन लॉक करते हैं, वैसे ही BMS को भी सुरक्षित करना चाहिए। इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करके सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सकता है। सरकार और परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों को भी ई-रिक्शा चालकों को जागरूक करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट जारी करते समय सुरक्षा प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यह तकनीकी कमजोरी केवल ई-रिक्शा तक सीमित नहीं रह सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्लूटूथ इनेबल्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग कई सोलर ग्रिड और पावर स्टोरेज सिस्टम में भी होता है। हाइब्रिड और ऑफग्रिड सोलर प्लांट में इस्तेमाल होने वाली लिथियम बैटरियां BMS के जरिए इन्वर्टर से कनेक्ट रहती हैं। यदि कोई अपराधी इन सिस्टम्स तक अनधिकृत पहुंच बना ले, तो बिजली सप्लाई प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि बड़े स्तर पर एक्सेस मिलने की स्थिति में ब्लैकआउट जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, सोलर पावर कंपनियों के इंजीनियर आमतौर पर BMS सिस्टम को पासवर्ड और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल से सुरक्षित रखते हैं।


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