28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी के उन देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैनिक और उनके सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागकर सीधे तौर पर अपनी सैन्य प्रतिक्रिया दर्ज कराई। पिछले कुछ दिनों से ईरान और इजरायल एक-दूसरे पर लगातार हवाई हमले कर रहे हैं और दोनों पक्षों ने संघर्ष को तेज कर दिया है। इस युद्ध के थमने के कोई संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ा दी है।
ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद सख्त रुख अपनाया है और उसने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस लड़ाई में पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खुलकर कहा है कि जरूरत पड़ी तो वे लंबे समय तक युद्ध जारी रखेंगे। दोनों पक्षों के आक्रामक बयानों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। लगातार हो रहे हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेल दिया है।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच खबर आई कि भारतीय वायु सेना के एफ-35I “अदिर” लड़ाकू विमान ने ईरानी वायु सेना के याक-130 लड़ाकू विमान को मार गिराया। इस कार्रवाई ने युद्ध के घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। बताया जा रहा है कि एफ-35 “अदिर” ने पहली बार किसी मानवयुक्त लड़ाकू विमान को निशाना बनाकर गिराया है। इस घटना को सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ इसे आधुनिक स्टील्थ तकनीक और उन्नत हथियार प्रणाली की बड़ी सफलता मान रहे हैं।
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अदिर की ऐतिहासिक कार्रवाई
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के चार दिन पूरे हो चुके हैं और अब चर्चा हथियारों के भंडार और सैन्य ताकत पर केंद्रित हो गई है। अमेरिकी सेनाओं ने हाल के दिनों में ईरान द्वारा दागी गई सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया है। इन सफलताओं के बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि अगर युद्ध कई हफ्तों तक जारी रहा तो अमेरिका अपने एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार कितने समय तक बनाए रख पाएगा। लंबे संघर्ष की स्थिति में संसाधनों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर यह दिखाने की कोशिश की है कि वह जवाबी कार्रवाई में सक्षम है। उसने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए अमेरिकी सेनाओं और उनके सहयोगी देशों को चुनौती दी है। अमेरिकी सेना ने सक्रिय रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए इन हमलों को नाकाम किया। हालांकि, हर इंटरसेप्शन के साथ महंगी और अत्याधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ा, जिनकी उपलब्धता सीमित होती है।
न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुसार, अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका है, जो अमेरिकी सेनाओं, उनके साझेदार देशों और क्षेत्रीय स्थिरता को निशाना बना रही थीं। उन्होंने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि इसकी भारी लागत चुकानी पड़ रही है। आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलें अत्यधिक महंगी होती हैं और उनका उत्पादन सीमित मात्रा में होता है। ऐसे में यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकता है।
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