सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को आदेश दिया कि देश में 93% सरकारी नौकरियां योग्यता के आधार पर भरी जाएं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्तमान कोटा व्यवस्था सत्ताधारी आवामी लीग के क़रीबी लोगों को फ़ायदा पहुंचाती है। इसके साथ ही कहा कि “1971 में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सेनानियों के परिजनों को केवल 5% आरक्षण दिया जाए। बाकी 2% नौकरियां विकलांग, ट्रांसजेंडर्स और नस्लीय अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित रखी गई हैं”। इस कारण से बांग्लादेश में हजारों छात्रों ने कोटा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया है।
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बांग्लादेश में प्रदर्शनों की हिंसा: कर्फ्यू लागू
बांग्लादेश में हाल के दिनों में चल रहे प्रदर्शनों में विशाल हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टें आ रही हैं। इसके बीच कम से कम 115 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ इस संख्या से ज्यादा हो सकती है। शुक्रवार को ही कम से कम 50 लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं के बाद, बांग्लादेश सरकार ने राजधानी ढाका में शनिवार को कर्फ्यू घोषित किया था। इसके बाद रविवार को भी ढाका की अधिकांश सड़कों पर सन्नाटा था, हालांकि कुछ क्षेत्रों में हल्की झड़पें भी रिपोर्ट की गई हैं। बांग्लादेश सरकार ने 2018 में इस विवादित कोटा प्रणाली को समाप्त कर दिया था, लेकिन पिछले महीने हाई कोर्ट के फैसले के बाद इसे फिर से लागू किया गया है, जिसके बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए हैं।
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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कोटा व्यवस्था फैसले का स्वागत किया
बांग्लादेश की सरकार ने कोटा व्यवस्था पर अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है. फ़ैसले के बाद बांग्लादेश के क़ानून मंत्री अनीसुल हक़ ने कहा कि सरकार अदालत के फ़ैसले को लागू करेगी. उन्होंने कहा, “हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं, हमें लगता है कि कोर्ट का ये फ़ैसला बहुत ही समझदारी भरा फ़ैसला है. जल्द से जल्द सरकार इसे लेकर एक अधिसूचना जारी करेगी.” उन्होंने कहा कि सोमवार को छुट्टी है और अगर अधिसूचना बहुत जल्द जारी करना हो तो हम मंगलवार तक इसे जारी कर देंगे. उन्होंने कहा, “सरकार को सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय डिविज़न के फ़ैसले और आदेश के आधार पर सर्कुलर जारी करना होगा.” उन्होंने सत्ताधारी पार्टी से जुड़े छात्र संगठन के प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा करने के आरोपों खारिज किया.
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उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों में विपक्षी ताकतें भी शामिल हो गई थीं जिन्होंने हिंसा भड़काने के काम किया और ‘बांग्लादेश के विकास के प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया.’ अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि अगर सरकार चाहे तो ज़रूरी होने पर इस नई कोटा व्यवस्था में सुधार कर सकती है. क़ानून मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में ऐसा इसलिए कहा है ताक़ि ये फ़ैसला भविष्य में सरकार के किसी भी निर्णय में बाधा ना डाले.


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