मार्च से मई 2026 के बीच भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मौसम बदल सकता है. पश्चिमी प्रशांत का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म रहेगा. इससे समुद्र सतह का तापमान बढ़ेगा. यह बदलाव मौसम पर असर डालेगा.
बदलता समुद्र का तापमान
कुछ हिस्सों में समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म होगा. इससे तापमान का अंतर बना रहेगा. समुद्र की सतह का तापमान (SST) कुछ जगहों पर बढ़ सकता है. उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच तापमान का फर्क भी दिखाई देगा.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य और पूर्वी प्रशांत में पहले से ठंडा पानी अब औसत के करीब आ सकता है. इससे कमजोर ला नीना (La Niña) खत्म होने की दिशा में जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो समुद्री और वायुमंडलीय स्थितियाँ बदलेंगी.
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव ENSO-Neutral अवस्था की ओर ले जा सकता है. ENSO-Neutral का मतलब है न La Niña न El Niño जैसा मजबूत प्रभाव. यानी समुद्र का तापमान सामान्य के करीब रहेगा.
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मौसम पर असर
इन बदलावों का असर दुनिया भर के मौसम पर भी दिख सकता है. समुद्र का गर्म होना बारिश, गर्मी और तूफानों को प्रभावित कर सकता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है.
भारत सहित कई देशों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. इससे गर्मी और अस्थिर मौसम के पैटर्न बन सकते हैं. समुद्र सतह का तापमान जितना अधिक बढ़ेगा, उतना ही वायुमंडलीय बदलाव संभव है.
इस रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में समुद्र और हवा के बीच के अंतर और बदल सकते हैं. यह बदलाव हर साल की तरह नहीं होगा. वैज्ञानिक इसे मौसम की संभावित नई चाल मान रहे हैं.
समुद्री तापमान की भविष्यवाणी मौसम विभाग और वैश्विक एजेंसियों द्वारा जारी की गई है. इसका मकसद लोगों को मौसम के बदलाव के लिए तैयार करना है. यह जानकारी खेती, समुद्री उद्योग, और यात्रा योजनाओं में मदद करेगी.
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