2025 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को मिला जिन्होंने नियामक टी-कोशिकाओं (Tregs) और उनके नियंत्रण में भूमिका निभाने वाले FOXP3 जीन की खोज की। इस खोज ने यह समझाने में मदद की कि कैसे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अपने हिस्सों पर हमला होने से बचती है। यह शोध खासकर स्वप्रतिरक्षी (ऑटोइम्यून) रोगों के अध्ययन में मील का पत्थर साबित हुआ है।
Also Read: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग 2030 तक 8 लाख करोड़ के शिखर पर
वैज्ञानिकों की खोजों का महत्व और भविष्य
शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि जब ये नियामक टी-कोशिकाएं काम नहीं करतीं या FOXP3 जीन में खराबी होती है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है। अब इस ज्ञान की मदद से डॉक्टर जल्दी निदान कर बेहतर उपचार दे पा रहे हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी में सुधार हो रहा है।स्वप्रतिरक्षी रोगों और अंग प्रत्यारोपण में ट्रेग्स बढ़ाकर इलाज हो रहा है। कैंसर में भी इन्हें कम या बदलकर इम्यूनिटी मजबूत करने पर काम चल रहा है। नोबेल विजेताओं के शोध ने प्रतिरक्षा तंत्र को संतुलित और गतिशील प्रणाली के रूप में समझाया। लेकिन महंगे और जटिल इलाजों के कारण चुनौतियां अभी भी बनी हैं।
Also Read: आज मनाई जा रही है कोजागिरी पूर्णिमा, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और कथा


More Stories
वैभव सूर्यवंशी की डेब्यू सीरीज के मैच अब शाम 6 बजे से होंगे, टाइमिंग में बदलाव विमेंस वर्ल्ड कप के कारण किया गया
Mumbai local argument over doorway ends in fatal stabbing; accused said he felt humiliated
Amazon to Invest $13 Billion in India’s AI Sector