कैबिनेट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने विपणन सीजन 2025-26 के लिए कच्चे जूट का एमएसपी 5,650 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने पिछले 10 वर्षों में ऐतिहासिक लक्ष्यों को प्राप्त किया है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और कच्चे जूट के एमएसपी पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण निर्णय
उन्होंने बताया कि 2021 और 2022 के बीच लगभग 12 लाख स्वास्थ्य कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में शामिल हुए और इस मिशन के तहत भारत ने कोविड-19 महामारी से प्रभावी रूप से निपटने में सफलता पाई।
गोयल ने इस दौरान मिशन की अहमियत पर भी जोर दिया, जिसे देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने और लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के रूप में देखा गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को विपणन सत्र 2025-26 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 5,650 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मंजूरी दी है।
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कच्चे जूट के एमएसपी में वृद्धि किसानों को मिलेगा 66.8% लाभ
यह एमएसपी पिछले सत्र के मुकाबले छह प्रतिशत या 315 रुपये अधिक है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साझा किया।
मंत्री ने बताया कि नया एमएसपी, जो देशभर के औसत उत्पादन लागत पर आधारित है, उत्पादकों को 66.8 प्रतिशत का लाभ प्रदान करता है, जिससे उन्हें आर्थिक तौर पर समर्थन मिलेगा।
यह निर्णय सरकार द्वारा किसानों और उत्पादकों को बेहतर कीमत देने के उद्देश्य से लिया गया है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
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2.35 गुना वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास
कच्चे जूट का एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि अब 2025-26 के विपणन सत्र के लिए इसे बढ़ाकर 5,650 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो कि 2.35 गुना वृद्धि है।
यह कदम किसानों की समृद्धि और उनके उत्पादों की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि वे अपनी मेहनत का उचित मूल्य पा सकें और उनकी जीवनस्तरीय में सुधार हो सके।
मंत्री गोयल ने कहा कि सरकार का यह उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उत्पादकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनके लिए एक स्थिर एवं लाभकारी माहौल बनाना है।
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