बेंगलुरु: देश के सबसे बड़े फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Swiggy और Zomato एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। बेंगलुरु के होटल और रेस्टोरेंट संगठनों ने दोनों कंपनियों को अल्टीमेटम जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ऑनलाइन ऑर्डर स्वीकार करना बंद कर देंगे। इस चेतावनी ने फूड डिलीवरी सेक्टर में हलचल मचा दी है। रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि बढ़ते कमीशन, अनिवार्य डिस्काउंट योजनाओं और कारोबार को प्रभावित करने वाली नीतियों के कारण उनका मुनाफा लगातार घट रहा है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की शर्तें छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट्स के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित हो रही हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो हजारों रेस्टोरेंट एक साथ सेवाएं रोकने का फैसला ले सकते हैं,
रेस्टोरेंट संगठनों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से Swiggy और Zomato के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उनका आरोप है कि दोनों कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट देती हैं, जिसका आर्थिक बोझ अंततः रेस्टोरेंट्स पर पड़ता है। इसके अलावा, उच्च कमीशन दरें, प्रोमोशनल शुल्क और अन्य सेवा शुल्क उनके कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी ने ग्राहकों तक पहुंच आसान बनाई है, लेकिन वर्तमान व्यापार मॉडल में रेस्टोरेंट्स का लाभ लगातार कम होता जा रहा है। उनका मानना है कि यदि पारदर्शी और संतुलित व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो छोटे व्यवसायों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाएगा।
कमीशन और डिस्काउंट नीति को लेकर रेस्टोरेंट मालिकों का विरोध, मांगें नहीं मानी गईं तो ऑनलाइन ऑर्डर बंद करने की चेतावनी
यदि रेस्टोरेंट्स अपने अल्टीमेटम पर अमल करते हैं, तो इसका सीधा असर बेंगलुरु के लाखों ग्राहकों पर पड़ेगा। शहर में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के भोजन के लिए Swiggy और Zomato जैसी सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में ऑनलाइन ऑर्डर बंद होने से ग्राहकों के विकल्प सीमित हो सकते हैं और कई लोकप्रिय रेस्टोरेंट्स की सेवाएं ऐप पर उपलब्ध नहीं रहेंगी। इसका असर केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिलीवरी पार्टनर्स की आय पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट्स प्लेटफॉर्म छोड़ते हैं, तो फूड डिलीवरी उद्योग की पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होगी। साथ ही, नए और छोटे रेस्टोरेंट्स की ऑनलाइन पहुंच भी कम हो सकती है, जिससे उनके कारोबार की वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के रेस्टोरेंट कारोबारियों की साझा चिंता को दर्शाता है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ कमीशन, मूल्य निर्धारण और प्रतिस्पर्धा से जुड़े कई मुद्दे भी सामने आए हैं। रेस्टोरेंट संगठनों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और व्यापारियों के बीच संतुलित साझेदारी आवश्यक है ताकि दोनों पक्षों को समान रूप से लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां अपनी नीतियों में पारदर्शिता लाती हैं और व्यापारियों की चिंताओं का समाधान करती हैं, तो विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। अन्यथा इस तरह के विरोध प्रदर्शन देश के अन्य शहरों में भी देखने को मिल सकते हैं।
फूड डिलीवरी कंपनियों और रेस्टोरेंट मालिकों के बीच बढ़ा विवाद, बेंगलुरु में ऑनलाइन सेवाओं पर मंडराया संकट
फिलहाल Swiggy और Zomato की ओर से इस अल्टीमेटम पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उद्योग जगत की निगाहें दोनों कंपनियों और रेस्टोरेंट संगठनों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं, तो ग्राहकों और व्यापारियों के हितों की रक्षा की जा सकती है। वहीं, यदि विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर फूड डिलीवरी उद्योग, रेस्टोरेंट कारोबार और लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान का सबसे बेहतर रास्ता संवाद और पारदर्शी व्यावसायिक नीतियां हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कंपनियां रेस्टोरेंट्स की मांगों को किस तरह संबोधित करती हैं और क्या बेंगलुरु में ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रह पाएंगी या फिर इस विवाद का व्यापक असर देखने को मिलेगा।


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