देशभर में अमूल दूध की कीमतों में एक रुपए की कमी की गई है। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने बताया कि अमूल गोल्ड, अमूल शक्ति और अमूल फ्रेश की कीमतें कम की गई हैं। यह नई कीमतें आज, 24 जनवरी से प्रभावी हो गई हैं।दूध का उत्पादन करने वाले गांव के सभी किसान डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी के मेंबर होते हैं। ये मेंबर रिप्रजेंटेटिव्स को चुनते हैं जो मिलकर डिस्ट्रिक्ट मिल्क यूनियन को मैनेज करते हैं।
Also Read: महाराष्ट्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट महंगा: बस, ऑटो-टैक्सी किराया बढ़ा
डिस्ट्रिक्ट यूनियन मिल्क और मिल्क प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग करती है। प्रोसेसिंग के बाद इन प्रोडक्ट्स को गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड डिस्ट्रीब्यूटर की तरह काम कर मार्केट तक पहुंचाता सप्लाई चेन को मैनेज करने के लिए प्रोफेशनल्स को हायर किया जाता है। दूध के कलेक्शन, प्रोसेसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में डायरेक्ट-इनडायरेक्ट रूप से करीब 15 लाख लोगों को रोजगार मिलता हैअमूल का मॉडल बिजनेस स्कूल्स में केस स्टडी बन गया है। इस मॉडल में डेयरी किसानों के कंट्रोल में रहती है। यह मॉडल दिखाता है कि कैसे प्रॉफिट पिरामिड के सबसे निचले हिस्से तक पहुंचता है।
गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा अमूल दूध की कीमतों में कमी
Also Read: पूर्व विधायक अनंत सिंह ने बाढ़ कोर्ट में किया सरेंडर
गुजरात के 33 जिलों में 18,600 मिल्क को-ऑपरेटिव सोसाइटीज और 18 डिस्ट्रिक्ट यूनियन हैं। इन सोसाइटीज से 36 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं, जो दूध का उत्पादन करते हैं।दूध को इकट्ठा करने के लिए सुबह 5 बजे से ही चहल-पहल शुरू हो जाती है। किसान मवेशियों का दूध निकालते हैं और केन्स में भरते हैं। इसके बाद दूध को कलेक्शन सेंटर पर लाया जाता है।सुबह करीब 7 बजे तक कलेक्शन सेंटर पर किसानों की लंबी लाइन लग जाती है। सोसाइटी वर्कर दूध की मात्रा को नापते हैं और फैट कंटेंट भी नापा जाता है। ये सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमेटेड होता है।
Also Read:रणजी ट्रॉफी में 10 साल बाद वापसी पर फेल, बल्ले से निकले केवल 3 रन यशस्वी का भी बेड़ा गर्क


More Stories
Hellhole remark: Iran defends India, China after Trump’s comment
X bug blocks Android users from opening shared links
ईरान का संवर्धित यूरेनियम: क्या परमाणु हथियार संभव?