August 18, 2026

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नागचंद्रेश्वर मंदिर

उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में बढ़ी भीड़, अफरा-तफरी के बीच 3 श्रद्धालु घायल

नागपंचमी के मौके पर उज्जैन में नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
नागचंद्रेश्वर मंदिर के साथ हरसिद्धि और बड़े गणेश मंदिर के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई।
भीड़ बढ़ने के साथ मंदिर मार्ग पर धक्का-मुक्की शुरू हो गई और स्थिति बिगड़ने लगी।
अव्यवस्था के बीच दबने से तीन श्रद्धालु घायल हो गए।
घायलों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

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घायलों को अस्पताल पहुंचाया, प्रशासन ने संभाली स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।
बल ने भीड़ को नियंत्रित करने और रास्ते में व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया।
घायल श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रशासन ने त्योहार के दौरान भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है।
इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं।
श्रद्धालुओं को इस दिन 24 घंटे भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का अवसर मिलता है।
इसी वजह से नागपंचमी पर उज्जैन में देशभर से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
साल के बाकी दिनों में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं।

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अनोखी प्रतिमा और धार्मिक मान्यताएं

मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव और माता पार्वती की एक प्राचीन प्रतिमा स्थापित है।
प्रतिमा में दोनों देवताओं को विशाल शेषनाग के फनों की छाया में विराजमान दिखाया गया है।
भगवान गणेश भी इस प्रतिमा में उनके साथ दिखाई देते हैं।
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताई जाती है।
कहा जाता है कि दुनिया में भगवान शिव का ऐसा स्वरूप बेहद दुर्लभ है।

मान्यता के अनुसार नागों के राजा तक्षक ने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी।
ऐतिहासिक विवरणों में प्रतिमा की स्थापना का संबंध परमार राजा भोज के शासनकाल से जोड़ा जाता है।
साल में सिर्फ एक दिन दर्शन मिलने के कारण नागपंचमी पर यहां भारी भीड़ रहती है।
भक्त मानते हैं कि नागचंद्रेश्वर के दर्शन से कालसर्प और सर्प दोष से राहत मिलती है।
इसी धार्मिक आस्था के चलते देश-विदेश से श्रद्धालु इस विशेष अवसर पर उज्जैन पहुंचते हैं।

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