नई दिल्ली: टॉम हॉलैंड एक बार फिर पीटर पार्कर के रूप में बड़े पर्दे पर लौटे हैं। उनकी नई फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ 30 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। spider man निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन ने इस बार कहानी को स्पाइडर-मैन: नो वे होम की घटनाओं के बाद से आगे बढ़ाया है। फिल्म की शुरुआत ऐसे दौर से होती है, जब पूरी दुनिया पीटर पार्कर की पहचान भूल चुकी होती है। लोग केवल स्पाइडर-मैन को जानते हैं, लेकिन उसके पीछे छिपे इंसान को नहीं पहचानते। पीटर अकेले न्यूयॉर्क की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है और अपनी निजी जिंदगी से भी लगातार संघर्ष करता है। फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को भावनात्मक माहौल में ले जाती है और यह दिखाती है कि सुपरहीरो होने की सबसे बड़ी कीमत अक्सर अकेलापन होती है। इसी भावनात्मक आधार पर पूरी कहानी आगे बढ़ती है।
फिल्म की कहानी केवल अपराधियों से लड़ाई तक सीमित नहीं रहती। पीटर पार्कर इस बार अपने भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष का भी सामना करता है। वह अपने फैसलों, जिम्मेदारियों और अतीत की यादों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। इसी दौरान जीन ग्रे की एंट्री होती है, जिसके पास असाधारण मानसिक शक्तियां हैं। उसका किरदार कहानी में नया मोड़ लाता है और कई घटनाओं को अप्रत्याशित दिशा देता है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि हर व्यक्ति अपने भीतर अच्छाई और बुराई के संघर्ष से गुजरता है। इसलिए यहां पारंपरिक सुपरविलेन की बजाय भावनात्मक टकराव को ज्यादा महत्व दिया गया है। क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते कहानी दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि असली लड़ाई बाहरी दुश्मनों से नहीं बल्कि खुद के भीतर छिपे डर, अपराधबोध और कमजोरियों से होती है।
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क्या फिल्म स्पाइडर-मैन के प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है पढ़ें डॉक्टर डूम की चर्चा, हल्क और पनिशर की मौजूदगी तथा फिल्म का पूरा रिव्यू
फिल्म में हल्क और पनिशर जैसे लोकप्रिय किरदार भी दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी भूमिका सीमित रखी गई है। हल्क अपने अनियंत्रित अवतार में नजर आता है और पहले की तरह अपनी शक्तियों पर पूरा नियंत्रण नहीं रख पाता। वहीं पनिशर की मौजूदगी कहानी को ज्यादा मजबूती नहीं देती। एमजे का किरदार भी इस बार अपेक्षाकृत छोटा है और वह पीटर पार्कर से जुड़ी पुरानी यादों से पूरी तरह अनजान रहती है। अभिनय की बात करें तो टॉम हॉलैंड ने एक बार फिर पीटर पार्कर के दर्द, जिम्मेदारियों और भावनाओं को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। वहीं सैडी सिंक ने जीन ग्रे के किरदार में दमदार प्रदर्शन किया है। उनका आत्मविश्वास, स्क्रीन प्रेजेंस और भावनात्मक अभिनय फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में शामिल होता है।
यह फिल्म सोनी के स्पाइडर-मैन यूनिवर्स का हिस्सा है, इसलिए इसे मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की बड़ी क्रॉसओवर फिल्मों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। कई प्रशंसकों को डॉक्टर डूम की एंट्री की उम्मीद थी, लेकिन फिल्म ऐसी कोई बड़ी सरप्राइज एंट्री नहीं दिखाती। निर्देशक ने कहानी का फोकस पूरी तरह पीटर पार्कर की निजी यात्रा और उसके भावनात्मक संघर्ष पर रखा है। एक्शन सीक्वेंस प्रभावशाली हैं, लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसके भावनात्मक दृश्य हैं। कुछ दर्शकों को इसकी रफ्तार धीमी लग सकती है, फिर भी फिल्म अपने संदेश और किरदारों के विकास के कारण अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है। कहानी यह संकेत भी देती है कि स्पाइडर-मैन की यात्रा अभी खत्म नहीं हुई और भविष्य में उसके सामने नई चुनौतियां आने वाली हैं।
टॉम हॉलैंड एक बार फिर पीटर पार्कर बनकर बड़े पर्दे पर लौटे हैं। जानिए ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ की कहानी, अभिनय और निर्देशन दर्शकों पर कितना प्रभाव छोड़ते हैं
कुल मिलाकर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ एक भावनात्मक सुपरहीरो फिल्म है, जो केवल बड़े एक्शन दृश्यों पर निर्भर नहीं रहती बल्कि अपने मुख्य किरदार की मानसिक और भावनात्मक यात्रा को भी विस्तार से दिखाती है। यदि आपने स्पाइडर-मैन: नो वे होम देखी है, तो यह फिल्म आपको कहानी का स्वाभाविक विस्तार महसूस होगी। नए दर्शकों को पिछली फिल्मों की जानकारी होने से कहानी बेहतर तरीके से समझ आएगी। टॉम हॉलैंड और सैडी सिंक का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है, जबकि कुछ सहायक किरदारों का उपयोग सीमित दिखाई देता है। डॉक्टर डूम जैसे बड़े सरप्राइज की कमी कुछ प्रशंसकों को निराश कर सकती है, लेकिन स्पाइडर-मैन के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म मनोरंजन, इमोशन और भविष्य की कहानी की मजबूत नींव एक साथ पेश करती है।
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