मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में करीब 60 नेताओं के निलंबन को लेकर संगठनात्मक विवाद गहराने लगा है। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को राहुल गांधी के कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने पर संगठन ने कार्रवाई की। निलंबित नेताओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संगठन ने बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए सीधे निलंबन का फैसला लिया। नेताओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत और आंदोलन में भागीदारी के बावजूद नेतृत्व ने उनकी परिस्थितियों पर विचार नहीं किया। यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी रोहित राजोरिया ने भी इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया है। उन्होंने संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व और हाईकमान तक अपनी शिकायत पहुंचाने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष और संगठनात्मक मतभेदों को उजागर कर दिया है।
राहुल गांधी की रैली में गैरहाजिरी पर 60 नेताओं का निलंबन, रोहित राजोरिया ने उठाए सवाल
रोहित राजोरिया ने अपनी अनुपस्थिति के पीछे पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए संगठन के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि वह 15 अक्टूबर को दिल्ली से अपने घर लौटे थे। अगले दिन उनके चाचा का निधन हो गया, जिससे परिवार में शोक का माहौल बन गया। इस दुखद घटना के कारण उन्हें मानसिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। राजोरिया के मुताबिक, इन परिस्थितियों ने उन्हें एक नवंबर को दिल्ली पहुंचने से रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन ने उनकी स्थिति जानने के लिए कोई संपर्क नहीं किया। इसके बजाय, उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से अपने निलंबन की जानकारी मिली। राजोरिया ने कहा कि संगठन के लिए वर्षों तक मेहनत करने के बाद ऐसी कार्रवाई से उन्हें गहरा दुख पहुंचा।
निलंबन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए रोहित राजोरिया ने संगठन से जवाबदेही की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना जरूरी है। संगठन को संबंधित व्यक्ति का पक्ष सुनकर परिस्थितियों की जांच करनी चाहिए। राजोरिया ने सवाल उठाया कि नेतृत्व ने बिना स्पष्टीकरण मांगे करीब 60 नेताओं को निलंबित कैसे कर दिया। उन्होंने इस फैसले को वर्षों से संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय बताया। राजोरिया ने कहा कि वह अपनी शिकायत राष्ट्रीय कार्यकारिणी और हाईकमान के सामने रखेंगे। उनका उद्देश्य संगठन के भीतर संवाद स्थापित करके मामले का समाधान निकालना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वरिष्ठ नेता उनकी शिकायत सुनेंगे और उचित निर्णय लेंगे।
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बिना नोटिस कार्रवाई पर यूथ कांग्रेस में नाराजगी, हाईकमान तक शिकायत पहुंचाने की तैयारी
राजोरिया ने अपनी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए संगठन के प्रति लंबे योगदान की बात कही। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2010 से यूथ कांग्रेस की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। संगठन के आंदोलनों और कार्यक्रमों में भाग लेते हुए उनके खिलाफ 12 से 13 मुकदमे दर्ज हुए। राजोरिया ने दावा किया कि विभिन्न मामलों में उन्हें तीन बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें तीन दिन, एक दिन और लगभग 13 दिन बिताने पड़े। राजोरिया के अनुसार, वर्षों के संघर्ष और योगदान के बावजूद निलंबन ने उन्हें निराश किया। उन्होंने कहा कि उनकी नाराजगी के बावजूद वह संगठन के भीतर ही विवाद सुलझाना चाहते हैं। राजोरिया राष्ट्रीय नेतृत्व से बातचीत करके अपना पक्ष रखेंगे और न्याय की मांग करेंगे।
निलंबन विवाद के बीच यूथ कांग्रेस की नेता नेहा बोरा ने भी कार्यकर्ताओं के सम्मान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से संगठन में काम करने वाले युवाओं को नेतृत्व के साथ संवाद का अवसर मिलना चाहिए। नेहा बोरा के मुताबिक, कई कार्यकर्ता 15 से 16 वर्षों से पार्टी के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत और बड़े कार्यक्रमों में भागीदारी के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। उन्होंने कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और संगठनात्मक मंच उपलब्ध कराने की मांग की। इस बीच, रोहित राजोरिया ने प्रदेश अध्यक्ष के चयन में चुनाव प्रक्रिया की भूमिका स्पष्ट की। फिलहाल 60 नेताओं के निलंबन से मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में असंतोष बढ़ा है। अब नाराज नेता हाईकमान के हस्तक्षेप और फैसले में संभावित बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।


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