महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मी चरम पर है, जहां 20 नवंबर को एक चरण में विधानसभा चुनाव होने हैं, और परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इस बार प्रमुख गठबंधन महायुति (भाजपा, शिवसेना शिंदे गुट) और महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना ठाकरे गुट) ने अधिकतर सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। चुनावों से पहले, तमाम पार्टियां अपने प्रमुख चेहरों को मैदान में उतार चुकी हैं।
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2019 के विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले। उस चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने मिलकर बहुमत हासिल किया था, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद उभर आया और दोनों का गठबंधन टूट गया। इसके परिणामस्वरूप, शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी गठबंधन बनाया और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। यह सरकार लगभग ढाई साल चली, लेकिन 2022 में शिवसेना में बगावत हुई और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में एक नया गुट बना जिसने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई। इसके बाद, महाराष्ट्र ने बीते पाँच साल में तीन मुख्यमंत्री देखे हैं।
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गठबंधन की सियासत, 2024 में फिर बड़ी टक्कर
अगर पिछले पांच चुनावों पर नजर डालें, तो 2009 और 2014 में भी महाराष्ट्र में गठबंधन राजनीति का असर देखा गया था। 2014 में पहली बार भाजपा ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़कर बड़ी संख्या में सीटें जीतीं। वहीं, 2019 में फिर गठबंधन में भाजपा-शिवसेना ने जीत हासिल की, लेकिन मुख्यमंत्री विवाद के चलते समीकरण बदल गए। इन चुनावों में भाजपा को 25% और शिवसेना को 16% वोट मिले थे।
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2024 के इस चुनाव में फिर से भाजपा-शिवसेना शिंदे गुट और महाविकास अघाड़ी आमने-सामने हैं, जहां मतदाताओं का रुझान निर्णायक साबित होगा।
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