भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने महाराष्ट्र में हो रहे महानगरपालिका चुनावों (वोटिंग) से पहले ही बड़ी राजनीतिक बढ़त बना ली है। कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में पार्टी की दो महिला उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल कर ली है, जिससे मतदान शुरू होने से पहले ही बीजेपी ने चुनावी खाता खोल लिया है।
कल्याण महानगरपालिका के तहत आने वाले दो प्रमुख क्षेत्रों में बीजेपी की उम्मीदवारों के खिलाफ किसी भी राजनीतिक दल या निर्दलीय प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया। इसके चलते रेखा राजन चौधरी और आसावरी केदार नवरे की जीत तय मानी जा रही है। इस सफलता के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोनों विजयी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं दीं और उनका स्वागत किया।
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रेखा चौधरी और आसावरी नवरे की निर्विरोध जीत से महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव में BJP का खाता खुला
रेखा चौधरी ने कल्याण पूर्व के पैनल क्रमांक 18-अ से चुनाव लड़ा है, जिसमें कचोरे, नेतीवली टेकड़ी, गावदेवी, नेतीवली–मेट्रोमॉल और शास्त्रीनगर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, आसावरी नवरे ने डोंबिवली पूर्व के प्रभाग क्रमांक 26-क से चुनाव लड़ा, जिसमें म्हात्रे नगर, राजाजी पथ, रामनगर, शिव मार्केट और सावरकर रोड जैसे इलाके आते हैं। इन दोनों सीटों पर किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं भरा, जिसके चलते इनकी जीत निर्विरोध तय मानी जा रही है।
हालांकि, निर्वाचन अधिकारियों की ओर से अभी औपचारिक घोषणा होना बाकी है। नामांकन पत्रों की जांच और अंतिम उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद ही इन जीतों को आधिकारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इसके बावजूद, कल्याण–डोंबिवली क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। पार्टी इसे मतदान से पहले मिली एक बड़ी चुनावी सफलता के रूप में देख रही है।
महाराष्ट्र में इस बार 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव कराए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान और 16 जनवरी 2026 को मतगणना की तारीख तय की है। नामांकन प्रक्रिया 23 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक चली थी, जबकि उम्मीदवार 2 जनवरी 2026 तक अपने नाम वापस ले सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कल्याण–डोंबिवली में बीजेपी की यह शुरुआती बढ़त आने वाले दिनों में पार्टी के चुनावी अभियान को और मजबूती दे सकती है। निर्विरोध जीत को स्थानीय स्तर पर संगठन की ताकत और विपक्ष की कमजोर रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।


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