हिमंता बिस्वा सरमा ने असम चुनाव में पहचान की राजनीति, कल्याणकारी योजनाओं और मजबूत चुनावी रणनीति के सहारे भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस जीत के साथ वे अब भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं की कतार में शामिल हो गए हैं। करीब 25 साल पहले, 13 मई 2001 को वे पहली बार जलुकबाड़ी सीट से कांग्रेस के टिकट पर असम विधानसभा पहुंचे थे, जहां उन्होंने वरिष्ठ नेता भृगु कुमार फूकन को हराया था।
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हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति और योजनाओं से भाजपा को असम में ऐतिहासिक जीत
समय के साथ सरमा का राजनीतिक सफर तेजी से बदला। वे कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए और 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। इस बार उन्होंने पार्टी का चेहरा बनकर चुनाव लड़ा और असम में भाजपा को 90 में से 82 सीटों पर जीत दिलाई, जबकि एनडीए गठबंधन ने कुल 126 में से 102 सीटें जीतीं। यह जीत राज्य के इतिहास में तीसरी सबसे बड़ी जनादेशों में से एक रही। सरमा ने चुनाव अभियान में घुसपैठ, पहचान और स्थानीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी, जिससे मतदाताओं का ध्रुवीकरण हुआ। इसके साथ ही उन्होंने कल्याण योजनाओं को भी मजबूत किया, जैसे ‘ओरुनोदोई’ योजना, जिसके तहत लाखों परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिला।
विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया ने भी उनके समर्थन आधार को मजबूत किया। इसके अलावा परिसीमन और राजनीतिक रणनीति ने भी चुनावी समीकरण बदले, जिससे विपक्ष कमजोर हुआ। कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की एकजुटता नहीं बन सकी, जबकि भाजपा ने मजबूत नैरेटिव तैयार किया। इस बार सरमा ने खुद को निर्णायक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया, और उनकी यह जीत उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष और संगठनात्मक क्षमता का परिणाम मानी जा रही है।
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