October 12, 2026

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दिल्ली में विपक्ष के मार्च के बीच BJP का प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद पर यौन शोषण का गंभीर आरोप, बांसुरी स्वराज ये बोलीं

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च से पहले बीजेपी ने दिल्ली में इस मुद्दे को उठाया। बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि वह अपने सांसद के खिलाफ लगे आरोपों पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की बात तो करती है, लेकिन जब मामला अपनी पार्टी के किसी नेता से जुड़ा होता है, तब उसकी प्रतिक्रिया अलग दिखाई देती है। बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर राजनीतिक दलों को केवल नारे नहीं लगाने चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर ठोस कदम भी उठाने चाहिए।

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‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे पर बांसुरी स्वराज ने उठाए सवाल

बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस के महिला सशक्तीकरण अभियानों पर सवाल उठाते हुए पार्टी के नारे ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस की महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता केवल राजनीतिक अभियानों तक सीमित है। बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने सांसद से जुड़े मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कांग्रेस के छात्र-केंद्रित कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया और सवाल किया कि शिकायत करने वाले 11 छात्रों की आवाज पार्टी के नेताओं तक क्यों नहीं पहुंच रही है। स्वराज के अनुसार, कांग्रेस को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दों पर राजनीतिक दलों का रवैया समान होना चाहिए। बीजेपी ने इन टिप्पणियों के जरिए कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं।

बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पितृसत्ता को खत्म करने संबंधी पुराने बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या पितृसत्ता के खिलाफ लड़ने की बात केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित है। बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के अधिकारों पर सार्वजनिक रूप से बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन अपने नेताओं से जुड़े विवादों पर उसका रवैया अलग दिखाई देता है। उनके अनुसार, महिला सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ केवल नारे लगाना नहीं, बल्कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। स्वराज ने इस मामले को कांग्रेस की कथनी और करनी के बीच अंतर का उदाहरण बताया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से पूछा कि वह अपने सांसद के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर क्या कदम उठाने के पक्ष में है।

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बिमोल अकोइजाम के खिलाफ कार्रवाई की मांग, कांग्रेस पर बरसी बीजेपी

इस विवाद के केंद्र में वर्ष 2024 में बिमोल अकोइजाम के खिलाफ 11 छात्रों द्वारा शिकायत दर्ज किए जाने का दावा है। बांसुरी स्वराज ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम, यानी पॉश एक्ट के तहत आंतरिक समिति गठित की थी। उन्होंने दावा किया कि समिति ने विस्तृत जांच की और इसके बाद अकोइजाम को उनके प्रोफेसर पद से बर्खास्त कर दिया गया। बीजेपी सांसद ने इन दावों का हवाला देते हुए कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। इस मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालांकि, शिकायतों की वास्तविक स्थिति, जांच के निष्कर्ष और विश्वविद्यालय की आधिकारिक कार्रवाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आवश्यक है।

बांसुरी स्वराज ने एक दिन पहले भी इस मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना की थी। उन्होंने राहुल गांधी के पितृसत्ता को चुनौती देने वाले बयान का हवाला देते हुए पूछा कि क्या पार्टी अपने नेताओं से जुड़े मामलों में भी समान जवाबदेही का समर्थन करती है। बीजेपी ने इस विवाद को महिलाओं की सुरक्षा और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व से स्पष्टीकरण मांगा है। इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले इस मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाले दलों को अपने रुख और व्यवहार में भी समानता रखनी चाहिए। दूसरी ओर, मामले की निष्पक्ष समझ के लिए विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड, जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं को देखना जरूरी है।

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