बिहार कोर्ट ने आयोग से कहा कि हटाए गए लोगों की सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से डाली जाए।हटाए गए नामों के पीछे मृत्यु, प्रवास या दोहराव जैसे कारणों का विवरण भी मांगा गया।बूथ स्तर अधिकारियों को निर्देश मिले हैं कि वे ये सूचनाएं अपने-अपने क्षेत्रों में चिपकाएं।कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अधिकार पार्टी एजेंटों की मेहरबानी पर निर्भर नहीं रह सकते।
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अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बिना सूचना और प्रक्रिया के 65 लाख नाम हटाए गए।कपिल सिब्बल ने आयोग पर आधार को पहचान दस्तावेज़ न मानने का आरोप लगाया।उन्होंने तर्क दिया कि नागरिकता साबित करना सरकार की जिम्मेदारी है, नागरिक की नहीं।उन्होंने दावा किया कि आयोग बिना आधार के ही वोटिंग अधिकार छीन रहा है।जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मतदाता अपने रिश्तेदारों के नाम देख सकते हैं?कोर्ट ने कहा कि नामों की सार्वजनिक सूची से गलतफहमियां दूर हो सकती हैं।कोर्ट ने कहा कि SoP के अनुसार व्यापक प्रचार और सूचना जरूरी है।उन्होंने पूछा कि 22 लाख मृतकों के नाम वेबसाइट पर क्यों नहीं दिखाए गए?
आयोग ने कहा कि 1 करोड़ लोगों ने दस्तावेज़ दिए, 4 करोड़ पहले से सूची में हैं।करीब 2.5 करोड़ मतदाताओं को अभी सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी है।उन्होंने बताया कि 6.5 करोड़ लोगों को दस्तावेज़ देने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।जस्टिस बागची ने कहा कि आपका तरीका सही हो, नागरिकों को राहत मिलनी चाहिए।पहले वह यह देखेगा कि क्या पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के अनुसार थी।अगर मृतक को जीवित दिखाया गया, या उल्टा हुआ, तो कार्रवाई की जाएगी।कोर्ट ने कहा कि आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर आयोग से जवाब मांगा जाएगा।सुनवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, फैसला जल्द आ सकता है।
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