पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत बना लिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। भाजपा ने राज्य की लगभग 70 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाते हुए सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ कर दिया। यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है, जहां लंबे समय से सत्तारूढ़ दल को कड़ी हार का सामना करना पड़ा।
राजारहाट न्यू टाउन सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां अंतिम राउंड तक परिणाम अधर में लटका रहा। भाजपा प्रत्याशी पीयूष कनोडिया ने 18वें राउंड में बाजी पलटते हुए 309 वोटों से जीत दर्ज की। उन्होंने कुल 1,06,564 वोट हासिल किए, जबकि टीएमसी के तापस चटर्जी को 1,06,255 वोट मिले। 17वें राउंड तक चटर्जी बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन अंतिम चरण में कनोडिया ने 600 अतिरिक्त वोट पाकर जीत अपने नाम कर ली।
कुल 294 में से 293 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जबकि फालता सीट पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया है और वहां 23 मई को वोटिंग होगी। कांग्रेस ने इस चुनाव में 2 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को भी सीमित सफलता मिली। इस चुनाव में कई सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसने नतीजों को और दिलचस्प बना दिया।
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टीएमसी की करारी हार, सत्ता से 15 साल बाद बाहर
तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पार्टी ने करीब 15 साल बाद सत्ता खो दी। पिछले चुनाव में 215 सीटें जीतने वाली टीएमसी इस बार 80 सीटों तक सिमट गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी भवानीपुर सीट से हार गईं, जहां भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करीब 15 हजार वोटों से पराजित किया। इस हार ने राज्य की राजनीति में नया समीकरण बना दिया है।
भाजपा अब सरकार गठन की तैयारी में जुट गई है और 8 मई को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बंगाल का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा तेज हो गई है और कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।
नई सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना 9 मई को जताई जा रही है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शुभेंदु अधिकारी के अलावा अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष और रूपाली गांगुली जैसे नाम चर्चा में हैं। चुनाव परिणामों के बाद राज्य में नई राजनीतिक दिशा तय होने जा रही है, जहां भाजपा पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है।


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