लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए कुल 543 में से 272 सांसदों का समर्थन आवश्यक है, लेकिन वर्तमान में लोकसभा में 542 सांसद हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट रिक्त है। इस वक्फ विधेयक को पारित करने के लिए एनडीए गठबंधन के पास आवश्यक संख्या से अधिक समर्थन है, क्योंकि इस गठबंधन के पास 272 से ज्यादा सांसद हैं। भाजपा, जो एनडीए का सबसे बड़ा घटक दल है, के पास अकेले 240 सांसद हैं। इस स्थिति में, भाजपा को वक्फ विधेयक को पारित कराने के लिए 32 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन प्राप्त करना होगा।
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वक्फ विधेयक के समर्थन में विभिन्न दलों का साथ एनडीए को मिल सकता है आवश्यक समर्थन
विधेयक के समर्थन में तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी), जदयू, लोजपा (रामविलास), एकनाथ शिंदे की शिवसेना, रालोद, जनता दल (सेक्युलर) और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी जैसे दल खड़े हैं। इसके अलावा, अजित पवार की राकांपा, अनुप्रिया पटेल का अपना दल, जीतनराम मांझी का हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम), ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न दल जैसे असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल भी एनडीए का समर्थन कर रहे हैं। इन दलों के समर्थन से भाजपा को विधेयक पारित कराने के लिए आवश्यक समर्थन मिल सकता है।
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विपक्षी दलों का एकजुट विरोध वक्फ विधेयक के प्रावधानों पर चिंता
विपक्षी दलों में प्रमुख दलों जैसे कांग्रेस (जिसके पास 99 सांसद हैं), समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके, शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार की राकांपा-एसपी, माकपा, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) जैसे दल विधेयक के खिलाफ एकजुट हैं। इनके अलावा, असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), वाईएसआरसीपी और आजाद समाज पार्टी ने भी इस विधेयक के विरोध का फैसला किया है। इन दलों का कहना है कि इस विधेयक के प्रावधान मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता और वक्फ संपत्तियों की देखरेख में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
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राज्यसभा में वक्फ विधेयक की चुनौती एनडीए को चाहिए 119 सांसदों का समर्थन
अगर लोकसभा में विधेयक पास होता है, तो उसे राज्यसभा में भी पारित करने की चुनौती होगी। राज्यसभा में कुल 245 सांसद हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इस सदन में 236 सांसद हैं और 9 सीटें रिक्त हैं। इसमें 12 नामित सदस्य हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 6 नामित सदस्य हैं। राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए 119 सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। हालांकि, राज्यसभा में भी एनडीए के पास बहुमत है, क्योंकि भाजपा के पास 98 सांसद हैं और इसके साथ जदयू, तेदेपा, राकांपा, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) जैसे अन्य दल भी समर्थन में हैं।
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राज्यसभा में विपक्ष का विरोध कई प्रमुख दलों ने वक्फ विधेयक के खिलाफ अपनाया रुख
राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ कांग्रेस (जो विपक्षी दलों में सबसे बड़ी पार्टी है और जिसके पास 27 सांसद हैं), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), डीएमके, वाईएसआरसीपी, एआईएडीएमके और बीजू जनता दल (बीजद) जैसे प्रमुख दल खड़े हैं। इसके अलावा, अन्य विपक्षी दलों में, जैसे कि एआईएमआईएम, माकपा, राष्ट्रीय जनता दल और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) भी इस विधेयक के खिलाफ वोट देने का संकेत दे चुके हैं। राज्यसभा में कुछ दलों का रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, जैसे तेलंगाना की भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), जो राज्यसभा में अपनी 1-1 सीट रखते हैं। इन दलों का रुख विधेयक के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
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भा.ज.पा. ने सहयोगी दलों की शर्तें मानी विधेयक में किए गए महत्वपूर्ण संशोधन
इस सब के बीच, भाजपा ने कुछ सहयोगी दलों के शर्तों को स्वीकार किया है ताकि विधेयक को पारित कराया जा सके। जैसे कि जदयू की प्रमुख मांग थी कि सरकार वक्फ संपत्ति से संबंधित धार्मिक स्थानों में हस्तक्षेप न करे, और विधेयक लागू होने से पहले की स्थिति को बनाए रखा जाए। वहीं, टीडीपी ने वक्फ संपत्ति विवादों के निपटारे के लिए राज्य सरकार को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार देने की बात की थी, जिसे सरकार ने मान लिया है। इसके अलावा, भाजपा ने अपने विधेयक में कुछ संशोधन किए हैं, जिनमें तेजस्वी सूर्या का सुझाव भी शामिल है कि केवल पांच वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति ही वक्फ संपत्ति दान कर सकेगा।
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