यूजीसी के नए नियमों पर देशभर में सियासी हलचल
उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के उद्देश्य से यूजीसी ने नए नियम लागू किए हैं, जिसके बाद देशभर में बहस तेज़ हो गई है। लखनऊ सहित कई शहरों में छात्रों और संगठनों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए। इस मुद्दे पर समर्थन और विरोध पार्टी सीमाओं से परे दिखाई दे रहा है। दलित और पिछड़े वर्गों से जुड़े कई नेता इन नियमों को समानता की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि सामान्य वर्ग के कई संगठन और नेता आशंका जता रहे हैं कि लोग इनका दुरुपयोग कर सकते हैं और झूठे आरोप छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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बीजेपी में भी असहमति, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
यूजीसी नियमों को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर भी मतभेद उभर आए हैं। कुछ नेताओं ने खुलकर विरोध जताया है और कुछ पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार नियमों के दुरुपयोग की अनुमति नहीं देगी और इन्हें संविधान के दायरे में ही लागू किया जाएगा। इस बीच, वकीलों ने इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और दलील दी है कि न्याय जाति के आधार पर नहीं होना चाहिए। अब इस विवाद पर अंतिम फैसला शीर्ष अदालत करेगी।


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