पिछले साल UGC NET की परीक्षा 29 जून को हुई थी और NTA ने 22 दिन बाद 21 जुलाई को रिजल्ट जारी कर दिया था। हालांकि, इस साल 30 जून को परीक्षा होने के बावजूद अब तक आंसर की जारी नहीं हुई है। इस देरी से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर कई उम्मीदवारों ने 14 अगस्त तक आंसर की जारी नहीं होने पर 15 अगस्त को लाल किले के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की बात कही है। NTA ने 10 अगस्त को इसी सप्ताह आंसर की जारी करने की बात कही थी।
सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों ने जताई नाराजगी
अभ्यर्थियों का कहना है कि आंसर की और रिजल्ट में देरी से एडमिशन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कई छात्र पीएचडी, जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए आगे की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों ने NTA से जल्द अपडेट जारी करने की मांग की है। कुछ छात्रों ने प्रशासन पर परीक्षा प्रक्रिया में अनावश्यक देरी का आरोप भी लगाया। वहीं, कई उम्मीदवारों ने कहा कि इस देरी से उनका समय और करियर दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
UGC NET परीक्षा को हुए करीब 45 दिन बीत चुके हैं, लेकिन NTA ने अभी तक आंसर की जारी नहीं की है। आंसर की के बाद आपत्ति दर्ज कराने और फिर रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही छात्र पीएचडी और अन्य कोर्स में एडमिशन ले सकेंगे। कई उम्मीदवारों ने बताया कि वे एडमिशन के लिए निजी विश्वविद्यालयों का रुख करने लगे हैं। उनका कहना है कि रिजल्ट के इंतजार में लगातार समय बर्बाद हो रहा है।
Also Read : पटियाला में पिटबुल का खौफनाक हमला, अंकित सभरवाल बोले- ‘मुझे न्याय चाहिए’, पत्नी ICU में
देरी से पीएचडी और रिसर्च प्रक्रिया पर असर
वोक्सन विश्वविद्यालय के सैयद हसन के अनुसार, UGC NET रिजल्ट में देरी का असर केवल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पीएचडी एडमिशन, जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे छात्रों को परेशानी होगी। विश्वविद्यालय भी समय पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, छात्रों को अपने शैक्षणिक भविष्य से जुड़े फैसले लेने में कठिनाई होगी। इससे नए अकादमिक सेशन की योजना भी प्रभावित हो सकती है।
सैयद हसन ने कहा कि UGC NET पीएचडी प्रवेश के लिए एक अहम माध्यम बन चुका है। ऐसे में रिजल्ट में देरी होने पर पीएचडी एडमिशन और रिसर्च गतिविधियां भी आगे खिसक सकती हैं। इससे कोर्सवर्क, क्वालिफाइंग एग्जाम और रिसर्च सुपरवाइजर के आवंटन में देरी हो सकती है। विश्वविद्यालयों को बाद में अकादमिक कैलेंडर में बदलाव करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक ऐसी देरी रहने पर इसका असर देश की रिसर्च व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।


More Stories
स्कॉर्पियो की टक्कर से बाइक सवार दो लोगों की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक हादसा
India’s Metro Network Expands From 248 Km to 1,200 Km in 12 Years: PM Modi
High Court Criticises ‘Loose Comments’ on Dia Mirza’s Diwali Ad, Directs BMC to Restore Video