April 24, 2026

Central Times

Most Trusted News on the go

मेडल

मेडल जीतने वाले खिलाड़ी चौकीदार की नौकरी को मजबूर

बिहार के अरवल जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो खेल प्रेमियों और सिस्टम, दोनों को सोचने पर मजबूर कर देती है. जिन कंधों पर कभी देश का तिरंगा लहराता था और जिनके गले में जीत के मेडल चमकते थे, आज वही खिलाड़ी सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं.अरवल के इन होनहारों का कसूर सिर्फ इतना है कि इन्होंने खेल को अपना करियर चुना, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि ये खिलाड़ी एक मामूली चौकीदार की नौकरी के लिए भी तरस रहे हैं.

वादों की फाइलों में दबे मेडल

सोमवार को अरवल की जिलाधिकारी अमृषा बैंस से मिलने पहुंचे इन खिलाड़ियों की आंखों में चमक की जगह अब हताशा नजर आती है. रग्बी फुटबॉल के नेशनल खिलाड़ी दिव्यांशु भारती और मार्शल आर्ट्स में देश का नाम रोशन करने वाले कृष्ण कुमार जैसे कई एथलीटों ने अपनी व्यथा सुनाई. इन खिलाड़ियों का कहना है कि साल 2023 में जिले में चौकीदार के 223 पदों पर बहाली निकली थी. उस वक्त के तात्कालिक प्रशासन ने वादा किया था कि 10 फीसदी सीटें खेल कोटे के लिए आरक्षित होंगी, लेकिन साल बीत गए और नियुक्ति का कहीं अता-पता नहीं है

Also Read:IIT में असफलता से गूगल तक 90 दिन में सफलता

उम्र निकलने का सता रहा है डर

खिलाड़ियों का दर्द सिर्फ नौकरी न मिलना ही नहीं है, बल्कि समय का हाथ से निकलना भी है. ड्रैगन बोल्ड की नेशनल खिलाड़ी रोशनी कुमारी ने बड़े ही भावुक अंदाज में कहा कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं. उन्हें डर है कि नौकरी का फैसला लेते-लेते कहीं उनकी उम्र ही न निकल जाए.अगर उम्र सीमा पार हो गई, तो ये मेडल और सर्टिफिकेट महज कागज के टुकड़े बनकर रह जाएंगे. अरवल खेल पदाधिकारी रितेश कुमार ने माना खिलाड़ियों की मांग जायज है, पहले चार खिलाड़ियों को खेल कोटे से नौकरियां मिली हैं। रितेश कुमार ने जिम्मेदारी सरकार पर डाली, कहा आदेश मिलते ही खिलाड़ियों की भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी।

Also Read:सीबीएसई में बड़ा बदलाव अब भाषा और स्तर के आधार पर होगी पढ़ाई