देशभर में खाना पकाने के लिए गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। एलपीजी आपूर्ति पर दबाव के बीच संस्थान अपने संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए कदम उठा रहे हैं। इसी के तहत आईआईटी बॉम्बे ने अपने छात्रावास के मेस मेन्यू में अस्थायी बदलाव किए हैं, ताकि सीमित गैस स्टॉक का सही उपयोग हो और छात्रों को भोजन की नियमित सुविधा मिलती रहे। संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, अब मेस में ऐसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं जिनमें गैस की खपत कम होती है। 14 मार्च से छात्र नए मेन्यू का अनुभव कर रहे हैं। यह फैसला दिखाता है कि वैश्विक परिस्थितियों और ईंधन आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच बड़े संस्थान भी सतर्कता बरत रहे हैं।
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एलपीजी संकट में मेस में क्या बदलाव हुए हैं?
नए मेन्यू के अनुसार, हर मील में अब केवल एक शाकाहारी डिश दी जा रही है, जबकि फिलहाल नॉन-वेज व्यंजन बंद कर दिए गए हैं। इसके अलावा, ज्यादा ऊर्जा खपत वाले तरीके जैसे तलना और लंबे समय तक उबालना भी अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं। रात के खाने में मिठाई की जगह मिल्कशेक या आइसक्रीम दी जा रही है। दूध अब सामान्य या ठंडा परोसा जाएगा, और दोपहर व रात के भोजन में फलों को भी शामिल किया गया है।
बदलाव की वजह
आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, ये कदम एलपीजी की कमी को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं। वैश्विक हालात और युद्ध जैसे हालात के चलते ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है, इसलिए ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजनों को फिलहाल हटाया गया है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह एक एहतियाती कदम है, जिससे उपलब्ध संसाधनों को बचाते हुए भोजन सेवा जारी रखी जा सके।
अन्य ईंधन प्रबंधन उपाय
आईआईटी बॉम्बे पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर नहीं है, क्योंकि यहां बायोगैस और इलेक्ट्रिक कुकिंग की सुविधाएं भी मौजूद हैं। इसके बावजूद, ईंधन की बचत के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। मेस के अलावा चाय पार्टी, गाला डिनर और विशेष लंच-डिनर जैसे कार्यक्रम भी फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं।छात्रों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराएं नहीं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जैसे ही एलपीजी आपूर्ति सामान्य होगी, मेस का नियमित मेन्यू बहाल कर दिया जाएगा।
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