दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल छात्रों के एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को अमान्य कर दिया है। कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को ट्रांसफर की अनुमति देने के लिए उचित नीति बनाने का निर्देश दिया, जिसमें आवश्यक शर्तें शामिल हों। अदालत ने ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन, 2023 के तहत ट्रांसफर संबंधी नियमों को संविधान विरोधी करार दिया, क्योंकि वे अविवेकपूर्ण और मनमाने थे। यह फैसला एक दृष्टिबाधित छात्र की याचिका पर दिया गया, जिसने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर से दिल्ली के कॉलेज में ट्रांसफर की मांग की थी। कोर्ट ने एनएमसी को तीन सप्ताह के भीतर ट्रांसफर आवेदन पर निर्णय लेने का आदेश दिया।
Also Read: फर्जीवाड़े पर लगाम: UIDAI ने हटाए 2.5 करोड़ आधार नंबर
दिल्ली हाईकोर्ट ने चार फरवरी को अपने फैसले में कहा कि मेडिकल संस्थानों में एकरूपता और मानक बनाए रखने के नाम पर ट्रांसफर पर पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है, क्योंकि यह विभिन्न परिस्थितियों में आवश्यक हो सकता है। अदालत ने इसे अविवेकपूर्ण और मनमाना करार दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि माइग्रेशन के दुरुपयोग की आशंका का तर्क खारिज किया, क्योंकि किसी नागरिक के वैध अधिकारों से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने बाड़मेर की कठोर जलवायु के कारण याचिकाकर्ता की चिकित्सीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांग व्यक्तियों को उचित सुविधा उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
ट्रांसफर प्रतिबंध अविवेकपूर्ण रेगुलेशन 18 अमान्य
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास बाड़मेर के सरकारी कॉलेज में सीट लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि उसे काउंसलिंग के शुरुआती चरणों में भाग लेने का अवसर नहीं मिला था। अदालत ने यह भी कहा कि हर सरकारी निर्णय में युक्तिसंगतता होनी चाहिए और 2023 के ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन, 2023 का रेगुलेशन 18 संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ होने के कारण अविवेकपूर्ण और मनमाना पाया गया। इसके चलते अदालत ने इसे अमान्य और अल्ट्रा वायर्स घोषित कर दिया।


More Stories
Dark Stores, Automated Warehouses Drive Fresh Hiring Opportunities Beyond Delivery Jobs
‘I Made a Mistake’: Punjab Youth Warns Against ‘Donkey Route’ in Tearful Mexico Video
600वें टेस्ट में उतरेगा भारत, गिल ने WTC फाइनल की राह बताई; श्रीलंका की स्पिन बनेगी बड़ी चुनौती