केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव लागू किया है और अब बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करेगा। बोर्ड ने यह फैसला छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन का अवसर देने के लिए लिया है। यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है, जिसमें रटकर सीखने के बजाय समझ आधारित मूल्यांकन पर जोर दिया गया है। CBSE का मानना है कि साल में दो बार परीक्षा से छात्रों को अपनी तैयारी सुधारने और बेहतर अंक लाने का अतिरिक्त मौका मिलेगा।
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि पहली बोर्ड परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगी। छात्रों को इस परीक्षा में कम से कम तीन विषयों की परीक्षा देनी होगी। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में शामिल नहीं होता है या न्यूनतम तीन विषयों में पास नहीं होता है, तो बोर्ड उसे कक्षा 10वीं में फेल घोषित करेगा। इसलिए छात्रों के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना बेहद जरूरी होगा और इसमें अच्छा प्रदर्शन करना भी अनिवार्य रहेगा।
दूसरी बोर्ड परीक्षा को सीबीएसई सुधार परीक्षा (Improvement Exam) के रूप में आयोजित करेगा। इस परीक्षा में छात्र अधिकतम तीन विषयों में ही शामिल हो सकेंगे, ताकि वे उन विषयों में अपने अंक सुधार सकें जिनमें उनका प्रदर्शन कमजोर रहा हो। बोर्ड इस परीक्षा को छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर मान रहा है, जिससे वे अपनी गलतियों को सुधार सकें और बेहतर परिणाम हासिल कर सकें।
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CBSE बोर्ड फाइनल मार्कशीट में सर्वश्रेष्ठ अंक दर्ज
सीबीएसई ने यह भी साफ किया है कि फाइनल मार्कशीट में दोनों परीक्षाओं में से प्राप्त सर्वोच्च अंक दर्ज किए जाएंगे। इससे छात्रों को फायदा मिलेगा, क्योंकि उनका रिजल्ट उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया जाएगा। यह नई व्यवस्था छात्रों को तनाव से राहत देगी और उन्हें बेहतर तैयारी करने के लिए प्रेरित करेगी।
परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं के हर पन्ने पर बारकोड लगाने की योजना बना रहा है, जिससे परीक्षार्थियों की पहचान सही तरीके से हो सके। डिजिटल मूल्यांकन का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही किया जा चुका है और भविष्य में इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा। साल में दो बार परीक्षा और मूल्यांकन होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का शुल्क बढ़ सकता है, हालांकि इस पर विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी।
सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति को अनिवार्य कर दिया है। यदि किसी छात्र की अटेंडेंस इससे कम होती है, तो बोर्ड उसे परीक्षा देने से रोक सकता है। बोर्ड ने स्कूलों से अपील की है कि वे छात्रों और अभिभावकों को इन नए नियमों और परीक्षा प्रणाली के बारे में सही जानकारी दें और छात्रों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी तैयारी में सहयोग करें, ताकि वे इन बदलावों को प्रभावी ढंग से अपनाकर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
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