सुनीता विलियम्स और शुभांशु शुक्ला एस्ट्रोनॉट बनने के रास्ते की प्रेरणादायक मिसाल हैं। उनके नाम आते ही लोगों को अंतरिक्ष और आसमान ज्यादा करीब लगने लगता है। ये कहानियां बताती हैं कि इस सपने के लिए जरूरी पढ़ाई बेहद अहम होती है। अंतरिक्ष यात्री किसी भी मानव स्पेस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। वे विज्ञान, तकनीक और भविष्य से जुड़े अहम कामों को अंजाम देते हैं।
शुभांशु शुक्ला ने वायुसेना पायलट से आईएसएस तक सफर किया। सुनीता विलियम्स ने नेवी पायलट से नासा तक पहचान बनाई। लोग पूछते हैं क्या सेना ही अंतरिक्ष जाने का एकमात्र रास्ता है। विशेषज्ञ कहते हैं आम नागरिक भी एस्ट्रोनॉट बन सकता है। इसके लिए सही शिक्षा, प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती जरूरी होती है।
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एस्ट्रोनॉट बनने की पढ़ाई, ट्रेनिंग और योग्यता
एस्ट्रोनॉट बनने की तैयारी ग्यारहवीं से ही शुरू हो जाती है। छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स पढ़ना जरूरी होता है। इसके बाद विज्ञान या इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करना पड़ता है। मास्टर्स या डॉक्टरेट डिग्री अंतरिक्ष एजेंसियां प्राथमिकता देती हैं। इसरो और नासा समय समय पर चयन परीक्षाएं आयोजित करते हैं।
अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस जरूरी है। फाइटर पायलटों को उच्च जोखिम संभालने का विशेष अनुभव होता है। वे दबाव में तेज और सही फैसले लेने में सक्षम होते हैं। इसी कारण गगनयान मिशन में वायुसेना पायलट चुने गए हैं। उन्हें वर्षों की कठिन ट्रेनिंग और मेडिकल परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।
एस्ट्रोनॉट बनने के लिए भारतीय नागरिकता भी अनिवार्य होती है। उम्र, कद और दृष्टि से जुड़े मानक भी पूरे करने होते हैं।
लीडरशिप, टीमवर्क और संचार कौशल बेहद जरूरी माने जाते हैं। भारत में एस्ट्रोनॉट की सैलरी सीमित जानकारी में उपलब्ध है। विशेषज्ञ औसतन मासिक वेतन नब्बे हजार रुपये बताते हैं।
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