महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में भारी तबाही मचा दी है। मुंबई, पुणे, पालघर और रायगढ़ समेत कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पुणे जिले की मावल तहसील के पाटन गांव में सोमवार तड़के भारी बारिश के कारण तीन स्थानों पर भूस्खलन हुआ। इनमें से एक भूस्खलन का मलबा सीधे एक मकान पर गिरा, जिससे घर पूरी तरह दब गया। हादसे के समय घर के अंदर तीन लोग मौजूद थे। बचाव दल ने मलबे से एक व्यक्ति का शव बरामद किया, जबकि दो अन्य लोगों की तलाश लगातार जारी है।
बारिश के कहर पर सियासत तेज, विपक्ष-सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के कारण अभियान में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसी दौरान मावल तहसील के घोरावाडी रेलवे स्टेशन के पास जलभराव में फंसी एक निजी बस से एनडीआरएफ ने 37 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। बचाव टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं।
मुंबई में भारी बारिश ने शहर की रफ्तार लगभग थाम दी है। पिछले कुछ दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में एक दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई जगह पेड़ गिरने, दीवारें ढहने और जलभराव की घटनाएं सामने आई हैं। मौसम विभाग ने मुंबई के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया है। कई सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों को ऑनलाइन काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग ने बुधवार से बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना भी जताई है।
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पुणे के पाटन गांव में भूस्खलन, एक की मौत और दो लोग लापता
लगातार बारिश का असर महाराष्ट्र विधानसभा के मॉनसून सत्र पर भी दिखाई दिया। कई मंत्री और विधायक समय पर विधानसभा नहीं पहुंच सके, जिसके कारण सदन का कोरम पूरा नहीं हो पाया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दूसरी ओर, मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना में चट्टान खिसकने और सुरंग में पानी रिसने की घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं ने परियोजना में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए। विपक्ष ने दावा किया कि पहली ही भारी बारिश में परियोजना की कमियां उजागर हो गईं।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा का परिणाम है। सरकार के मंत्रियों और नेताओं ने बताया कि प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्य चला रहा है और सभी संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी मानवीय लापरवाही सामने आएगी, वहां उचित कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने विपक्ष पर प्राकृतिक आपदा को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान लोगों की सुरक्षा, राहत कार्यों और सामान्य जनजीवन को जल्द बहाल करने पर केंद्रित है।


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