सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी पर लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में भारी भीड़ जुटी। सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। यह कतार करीब 2 किलोमीटर तक पहुंच गई थी। बिहार के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी लोग पहुंचे। श्रद्धालु रविवार रात से ही मंदिर आने लगे थे। सुबह 4 बजे तक भीड़ और बढ़ गई। इसके बाद सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच अशोक धाम हॉल्ट पर दो पैसेंजर ट्रेनें पहुंचीं। दोनों ट्रेनों से बड़ी संख्या में यात्री उतरे। इनमें महिलाओं की संख्या भी काफी थी। यात्रियों के मंदिर की ओर बढ़ने से भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया।
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अचानक बढ़ गया भीड़ का दबाव
लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार ने हादसे को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए तैयारी की थी। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से काफी ज्यादा पहुंच गई। इसी दौरान भीड़ के दबाव से एक तरफ का बैरिकेड टूट गया। इसके बाद कई लोग अपना संतुलन खो बैठे। कुछ श्रद्धालु नीचे गिर गए। प्रशासन ने तुरंत घायलों को अस्पताल भेजना शुरू किया। इसी बीच पास का एक बिजली का पोल भी गिर गया। पोल गिरते ही भीड़ में करंट फैलने की अफवाह चल पड़ी। हालांकि, प्रशासन के अनुसार उस समय बिजली की सप्लाई बंद थी। तार भी कवर्ड थे। इसके बावजूद अफवाह ने लोगों में डर पैदा कर दिया।
करंट की अफवाह फैलते ही लोग घबरा गए। श्रद्धालुओं ने खुद को बचाने के लिए भागना शुरू कर दिया। इससे पहले से मौजूद भीड़ का दबाव और बढ़ गया। संकरे रास्ते में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। पीछे से आ रही भीड़ ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया। इस भगदड़ में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल भी हुए। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन ने शुरुआती जांच में भीड़ का दबाव और अफवाह को हादसे की बड़ी वजह बताया।
सावन सोमवार और नागपंचमी का संयोग
अशोक धाम में इस बार सामान्य दिनों से ज्यादा भीड़ जुटी। इसकी बड़ी वजह सावन सोमवार और नागपंचमी का संयोग था। धार्मिक मान्यताओं में सावन सोमवार का विशेष महत्व है। नागपंचमी पर भी श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करते हैं। ऐसे में हजारों लोग इस खास दिन मंदिर पहुंचे। अशोक धाम को लोग ‘मिनी देवघर’ भी कहते हैं। यहां इंद्रदमनेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर है। पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी। उन्होंने यहां एक बड़ा यज्ञ भी किया था। इसी वजह से शिवलिंग को इंद्रदमनेश्वर महादेव कहा जाता है।
अशोक धाम का आधुनिक इतिहास भी काफी रोचक है। स्थानीय मान्यता के अनुसार 7 अप्रैल 1977 को एक बच्चे ने यहां विशाल शिवलिंग देखा था। उस बच्चे का नाम अशोक था। वह अपने दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा खेल रहा था। इसी दौरान जमीन की खुदाई करते समय काले पत्थर का शिवलिंग दिखाई दिया। बाद में स्थानीय लोगों और पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई की। इसके बाद विशाल प्राकृतिक शिवलिंग की जानकारी सामने आई। इसी बच्चे के नाम पर इस जगह का नाम अशोक धाम पड़ा। हर साल सावन में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। वे भगवान शिव को जल चढ़ाते हैं। लेकिन इस बार भीड़ और अफवाह ने बड़ा हादसा कर दिया। सात परिवारों ने अपने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया।
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