गुजरात सरकार ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए ‘हेल्थ पासपोर्ट’ योजना शुरू की है। इस नई पहल के तहत राज्य के प्रत्येक बच्चे का जन्म से अठारह वर्ष तक मेडिकल रिकॉर्ड तैयार होगा। हेल्थ पासपोर्ट में स्वास्थ्य जांच, पोषण स्तर, बीमारियों और विकास संबंधी पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। सरकार इस योजना के माध्यम से बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाना चाहती है। परिवारों को अब बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री के लिए अलग-अलग दस्तावेज संभालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हेल्थ पासपोर्ट एक ही दस्तावेज में बच्चों की संपूर्ण स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध कराएगा। राज्य सरकार ने योजना को स्कूल हेल्थ-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत लागू किया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में किया।
गुजरात सरकार की नई पहल: बच्चों को मिलेगा हेल्थ पासपोर्ट
राज्य सरकार हर वर्ष लगभग एक करोड़ नवासी लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए सरकार ने नौ सौ बानवे मोबाइल हेल्थ टीमों की नियुक्ति की है। ये टीमें आंगनवाड़ी, स्कूल, मदरसा, गुरुकुल और विशेष शिक्षण संस्थानों में नियमित जांच करेंगी। स्वास्थ्य जांच के दौरान विशेषज्ञ बच्चे की शारीरिक और मानसिक स्थिति का मूल्यांकन सावधानीपूर्वक करेंगे। पहले बच्चों की स्वास्थ्य जानकारी केवल डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध रहती थी और अभिभावकों को कठिनाई होती थी। अब हेल्थ पासपोर्ट के माध्यम से परिवारों को बच्चों की स्वास्थ्य जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध होगी। सरकार ने योजना का उद्देश्य बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना बताया है। मोबाइल हेल्थ टीमें जांच के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सुझाव और पोषण संबंधी जानकारी भी प्रदान करेंगी।
सरकार ने हेल्थ पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया को बेहद आसान और सुविधाजनक बनाया है। अभिभावकों को योजना के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज या लंबी प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा। मोबाइल हेल्थ टीम स्वास्थ्य जांच पूरी करने के बाद बच्चों का डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करेगी। इसके बाद संबंधित स्थान पर ही बच्चों को हेल्थ पासपोर्ट उपलब्ध करा दिया जाएगा। सरकार हर वर्ष हेल्थ पासपोर्ट को अपडेट और नवीनीकृत करने की व्यवस्था भी लागू करेगी। पांच वर्ष तक के बच्चों और स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों का नवीनीकरण स्वास्थ्य केंद्र करेगा। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों का हेल्थ पासपोर्ट संबंधित स्कूल के प्राचार्य द्वारा नवीनीकृत किया जाएगा। सरकार ने योजना को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जोड़कर रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाया है।
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जन्म से 18 साल तक एक जगह सुरक्षित रहेगा पूरा मेडिकल रिकॉर्ड
हेल्थ पासपोर्ट में बच्चों की जन्म से अठारह वर्ष तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा दर्ज होगी। दस्तावेज में बच्चे का नाम, आयु और अन्य सामान्य जानकारी स्पष्ट रूप से शामिल रहेगी। इसके अलावा सभी आयु वर्गों के अनुसार हुई स्वास्थ्य जांच का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से दर्ज होगा। सरकार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिन्हित चार प्रमुख श्रेणियों का विवरण भी जोड़ेगी। इन श्रेणियों में जन्मजात विकार, गंभीर बीमारियां, पोषण की कमी और विकास संबंधी समस्याएं शामिल होंगी। हेल्थ पासपोर्ट में बच्चों की शारीरिक वृद्धि और मानसिक विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रहेगी। विशेषज्ञ पोषण स्तर, रेफरल सेवाओं और स्वास्थ्य सुझावों को भी पासपोर्ट का अनिवार्य हिस्सा बनाएंगे। सरकार स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी सलाह और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी दस्तावेज में शामिल करेगी।
गुजरात सरकार ने हेल्थ पासपोर्ट को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की व्यवस्था लागू की है। अभिभावकों को हेल्थ पासपोर्ट की फिजिकल कॉपी उपलब्ध रहेगी जबकि रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेगा। यदि किसी कारणवश हेल्थ पासपोर्ट खो जाता है तो नया दस्तावेज आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। मोबाइल हेल्थ टीम डिजिटल रिकॉर्ड की सहायता से बच्चों का नया हेल्थ पासपोर्ट तुरंत उपलब्ध कराएगी। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं बल्कि जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित स्वास्थ्य निगरानी से बच्चों में गंभीर बीमारियों की पहचान समय रहते होगी। सरकार भविष्य में इस योजना को और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की तैयारी भी कर रही है।


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