दिल्ली से कोलकाता तक सड़क यात्रा को तेज और आसान बनाने के लिए छह प्रमुख एक्सप्रेसवे को एकीकृत नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक लगातार एक्सप्रेसवे पर सफर संभव होगा। यह नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को हाई-स्पीड सड़क संपर्क से जोड़ेगा। इसके पूरा होने पर यात्रियों को वर्तमान 22 से 24 घंटे के बजाय लगभग 12 से 13 घंटे में दिल्ली से कोलकाता पहुंचने की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना यात्रा को अधिक सुरक्षित, तेज और आरामदायक बनाएगी। साथ ही, क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक गतिविधियों और पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
Also read :AI बना खौफनाक साजिश का जरिया! मां-बाप और बहन की कातिल बनी बेटी
6 एक्सप्रेसवे से 12 घंटे का सफर
इस नए नेटवर्क में दिल्ली के डीएनडी से यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे आपस में जुड़ेंगे। इस कनेक्टिविटी के जरिए दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 6.5 से 7 घंटे में पूरी होगी, जबकि वाराणसी से कोलकाता तक का सफर करीब 6 घंटे में तय किया जा सकेगा। वर्तमान में यही दूरी राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और जीटी रोड के जरिए 22 से 24 घंटे लेती है। यह नया एक्सप्रेसवे नेटवर्क न केवल समय बचाएगा बल्कि लंबी दूरी की सड़क यात्रा को अधिक सुगम और सुविधाजनक भी बनाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी देकर राज्य में एक बड़े एक्सप्रेसवे ग्रिड की दिशा में । सरकार वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के साथ एक आधुनिक इंटरचेंज भी बनाएगी, जिससे सभी प्रमुख मार्ग एक-दूसरे से जुड़ सकें। विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र सहित कई जिलों को जोड़ेगा, जबकि विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इन दोनों परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
Also read :कश्मीर के अनंतनाग-कोकरनाग मार्ग पर आतंकवादी हमला, एक पुलिसकर्मी शहीद, दूसरा घायल
यूपी से बंगाल तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
करीब 610 किलोमीटर लंबा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे इस पूरे नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा। छह लेन वाला यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को सीधे जोड़ेगा। परियोजना पूरी होने के बाद वाराणसी से कोलकाता की यात्रा 13 से 14 घंटे के बजाय केवल 6 से 7 घंटे में पूरी हो सकेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना को 2027-28 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। एक्सप्रेसवे कई प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ते हुए पूर्वी भारत की सड़क कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा।
सरकार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए भी नई लिंक परियोजनाएं शुरू करेगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश में एक मजबूत एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार होगा, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच तेज आवाजाही संभव होगी। इसके अलावा, दिल्ली से कोलकाता तक माल ढुलाई का समय लगभग आधा रह जाएगा, जिससे उद्योग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। उत्तर भारत से पूर्वी भारत के बंदरगाहों तक सामान की तेज आवाजाही निर्यात और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। यह पूरा नेटवर्क देश के परिवहन ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।
Also read :अजय देवगन की ‘चौहान’ को लेकर जीशान अय्यूब नाराज, बोले- मेरी आवाज का गलत इस्तेमाल किया गया


More Stories
Will ( AI ) Artificial intelligence Replace Jobs? What Tech Leaders and Employees Say About the Future
बच्चे को पीठ पर बांधकर ड्यूटी करती मां का वीडियो वायरल, लोग बोले- ‘आधुनिक झांसी की रानी’
Trump U-Turn: US to Buy Russian Diesel as Zelenskyy Calls Move a ‘Gift to Putin’