पूर्वी भारत के रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चार राज्यों में कुल 410 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 9,450 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों का दबाव कम करना और यात्री व माल परिवहन को अधिक सुगम बनाना है। खासतौर पर खड़गपुर से चेन्नई की ओर जाने वाली ट्रेनों को कई बार व्यस्त रूट पर दूसरे ट्रैफिक के कारण इंतजार करना पड़ता है। नई रेल लाइनों के निर्माण के बाद ऐसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। इससे यात्रियों के सफर का समय घट सकता है और मालगाड़ियों की आवाजाही भी तेज हो सकती है। सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना पूर्वी भारत में परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी।
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क्षमता बढ़ने से व्यस्त रेल रूटों पर कम होगा दबाव
पूर्वी तट का रेलवे नेटवर्क देश के सबसे महत्वपूर्ण माल ढुलाई गलियारों में शामिल है। इन मार्गों से कोयला, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट, कंटेनर और ऑटोमोबाइल जैसे बड़े पैमाने पर माल की आवाजाही होती है। कई प्रमुख रेल सेक्शन अपनी मौजूदा क्षमता के करीब पहुंच चुके हैं, जिसके कारण यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों को ट्रैक उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। नई लाइनों के जुड़ने से रेल नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे ट्रेनों को अधिक सुचारू तरीके से चलाने में मदद मिलेगी और माल ढुलाई की गति भी बेहतर हो सकती है। रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार से बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा। इसका सीधा फायदा उद्योगों को मिल सकता है, क्योंकि कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही अधिक तेजी से होने की संभावना है।
करीब 9,450 करोड़ रुपये की यह परियोजना चार राज्यों—पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु—में लागू होगी। इसके तहत पूर्वी तट के महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइनें बिछाई जाएंगी। इन परियोजनाओं का मकसद केवल रेलवे की क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर करना भी है। बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित बंदरगाहों से देश के अलग-अलग हिस्सों तक माल पहुंचाने में रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका है। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से इन मार्गों पर ट्रैफिक का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे यात्रियों को भी अधिक सुविधाजनक और समयबद्ध रेल सेवाएं मिलने की उम्मीद है। चार राज्यों में फैली इस योजना को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से नए व्यापारिक अवसर पैदा होने की संभावना है।
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खड़गपुर-भद्रक और भद्रक-हरिदासपुर सेक्शन में बढ़ेगी क्षमता
परियोजना के तहत खड़गपुर-भद्रक रेल सेक्शन में 173 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बिछाने की योजना है। इसके अलावा भद्रक-हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर लंबे हिस्से में भी चौथी लाइन जोड़ी जाएगी। ये दोनों सेक्शन पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क का हिस्सा हैं और यहां यात्री तथा मालगाड़ियों की लगातार आवाजाही रहती है। अतिरिक्त ट्रैक बनने से मौजूदा लाइनों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों और मालगाड़ियों को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए अतिरिक्त लाइनें उपयोगी साबित होंगी। रेलवे के अनुसार, इस तरह के विस्तार से परिचालन क्षमता बढ़ती है और ट्रेनों को एक-दूसरे के लिए अधिक समय तक रोकने की जरूरत कम होती है। इससे यात्रियों के समय की बचत होने के साथ माल परिवहन की दक्षता भी बेहतर हो सकती है।
परियोजना के बाकी दो हिस्सों में गुम्मिडिपूंडी-गुडूर और कटक-पारादीप रेल सेक्शन शामिल हैं। गुम्मिडिपूंडी-गुडूर के बीच 90 किलोमीटर के हिस्से में तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी। वहीं कटक-पारादीप के 72 किलोमीटर लंबे सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन जोड़ने की योजना है। इन अतिरिक्त लाइनों से दक्षिण और पूर्वी भारत के बीच रेल यातायात की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासकर औद्योगिक सामान और बंदरगाहों से आने-जाने वाले माल की आवाजाही को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। रेलवे नेटवर्क के विस्तार से माल ढुलाई की लागत और समय को कम करने में भी मदद मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के जरिए प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और बाजारों के बीच तेज संपर्क तैयार करना है। इससे रोजगार, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी लंबे समय में बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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