नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात हुए हादसे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा संज्ञान लिया है। इस हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी से भरे गड्ढे में गिरकर मौत हो गई थी।
इसलिए, ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश सरकार के सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर हलफनामे के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
NGT ने कहा कि यह घटना पर्यावरणीय नियमों की गंभीर अनदेखी को दर्शाती है। वहीं, यह मामला कानून के उल्लंघन की ओर भी इशारा करता है। युवराज की मौत के छह दिन बाद इस पर कार्रवाई की गई है।
संबंधित विभागों को नोटिस
इसी बीच, ट्रिब्यूनल ने नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी बनाया है।
इसके अलावा, गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को भी नोटिस भेजा गया है। सभी से एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
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मॉल प्रोजेक्ट की जमीन बनी तालाब
NGT की रिपोर्ट के अनुसार, यह जमीन पहले एक निजी मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित थी। हालांकि, करीब एक दशक तक इस पर कोई काम नहीं हुआ।
नतीजतन, बारिश का पानी और आसपास की सोसायटियों का गंदा पानी वहां जमा होता रहा। धीरे-धीरे यह जगह तालाब में बदल गई।
इसके अलावा, ट्रिब्यूनल ने स्थानीय निवासियों के आरोपों का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि जलभराव की समस्या लंबे समय से थी।
लेकिन, नोएडा अथॉरिटी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। निवासियों के अनुसार, हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ने पर खतरा और बढ़ जाता था।
अंततः, प्रथम दृष्टया तथ्यों के आधार पर NGT ने माना कि यह मामला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन से जुड़ा है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और कानूनी जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


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