सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के निठारी सीरियल किलिंग मामले में सुरेंद्र कोली को बरी किया। कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि रद्द करते हुए आदेश दिया कि उसे तुरंत रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोली किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तुरंत रिहाई सुनिश्चित करें। इस निर्णय के बाद कोली अब उन सभी आरोपों से मुक्त हो गए जिनमें दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में कोली की सुधारात्मक याचिका स्वीकार कर फैसला सुनाया। सुरेंद्र कोली ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक याचिका दायर की थी।
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नोएडा निठारी कांड: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को बरी किया निठारी मामले में दोषसिद्धि रद्द
फरवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने 15 वर्षीय लड़की की हत्या में उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाकी 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया था। इस वर्ष कोली ने अंतिम मामले के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ शामिल थे। पीठ ने सभी आरोपों से कोली को बरी कर अंतिम दोषसिद्धि रद्द करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति नाथ ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता को आरोपों से तुरंत मुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि दोषसिद्धि केवल एक बयान और चाकू पर आधारित थी।
निठारी हत्याकांड 2005 और 2006 के बीच नोएडा में हुआ था और देश में सनसनी फैलाई। मामला दिसंबर 2006 में सामने आया जब नाले में मानव कंकाल पाए गए थे। जांच में पता चला कि मोनिंदर सिंह पंढेर घर का मालिक और सुरेंद्र कोली उसका नौकर था। इस मामले ने स्थानीय पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों की बड़ी जांच शुरू करवाई। कोली पर कई हत्याओं और बलात्कार के आरोप लगे थे जिनमें कुछ बाद में रद्द किए गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोली के तत्काल रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निर्णय के बाद राष्ट्रीय मीडिया और नागरिकों ने राहत की प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


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