July 17, 2026

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श्रद्धा वॉकर केस में कोर्ट का सख्त रुख, आफताब की टालमटोल पर फटकार

श्रद्धा वॉकर हत्याकांड के ट्रायल की धीमी रफ्तार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को परीक्षा देने के लिए एक दिन की राहत देते हुए सुनवाई स्थगित की थी। इसके बाद सवाल उठा कि क्या अदालत बार-बार आरोपी की स्थगन की मांग स्वीकार कर रही है और इसी कारण हाई-प्रोफाइल मामले का ट्रायल धीमा पड़ रहा है। हालांकि अदालत के पुराने आदेशों और रिकॉर्ड की समीक्षा अलग तस्वीर पेश करती है। रिकॉर्ड बताते हैं कि ट्रायल शुरू होने के बाद अदालत ने लगातार सुनवाई तेज करने की कोशिश की है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की ओर से होने वाली देरी पर कई बार सवाल उठाए और गवाहों की गवाही जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए।

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दो तारीखों की मांग खारिज, अदालत ने बनाया ब्लॉक कैलेंडर

अदालत ने आफताब की उस मांग को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उसने हर महीने केवल दो सुनवाई की तारीखें तय करने की अपील की थी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने 212 से अधिक गवाहों को सूचीबद्ध किया है और इनमें कई गवाह दिल्ली के बाहर से आते हैं। ऐसे में सुनवाई की तारीखें सीमित करने से मुकदमा और लंबा खिंच सकता है। अदालत ने इसके बाद ट्रायल को तेज करने के लिए ब्लॉक कैलेंडर बनाया और रोजाना सुनवाई की व्यवस्था पर जोर दिया। मई 2022 में आफताब ने कथित तौर पर अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वॉकर की दिल्ली के महरौली स्थित फ्लैट में गला घोंटकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि उसने श्रद्धा के शव के कई टुकड़े किए और उन्हें फ्रिज में रखा।

ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड बताते हैं कि अदालत ने कम से कम सात मौकों पर सुनवाई में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई। फरवरी 2024 में अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे कार्यवाही रोकने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्य वकील की अनुपस्थिति का हवाला देकर अतिरिक्त समय मांगने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। मई 2024 में कोर्ट ने फिर कहा कि बचाव पक्ष के वकील जानबूझकर कार्यवाही में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि उसने बचाव पक्ष की सुविधा के अनुसार तारीखें तय की थीं, लेकिन वकील उन तारीखों पर भी उपस्थित नहीं हुए। जुलाई 2024 में आफताब ने हर महीने सिर्फ दो तारीखों की मांग की, जिसे अदालत ने ट्रायल लंबा खींचने का तरीका बताते हुए खारिज कर दिया।

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रोजाना सुनवाई के आदेश से ट्रायल तेज करने की तैयारी

अदालत ने बचाव पक्ष को गवाहों की जिरह पूरी करने के लिए कई बार अंतिम अवसर दिए। सितंबर 2023 में कोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन पक्ष के दो गवाहों से जिरह के लिए अब कोई अतिरिक्त मौका नहीं मिलेगा। अक्टूबर में एक अन्य गवाह से जिरह पूरी करने के लिए आखिरी अवसर दिया गया। मई 2024 में अदालत ने चेतावनी दी कि तय तारीखों पर वकील उपस्थित नहीं हुए तो दूसरे गवाहों से जिरह का अधिकार भी खत्म किया जा सकता है। अक्टूबर और नवंबर 2024 में कोर्ट ने दोबारा अंतिम अवसर देते हुए ऐसी ही चेतावनी जारी की। अप्रैल 2025 में मुंबई से आए एक सरकारी गवाह को दोबारा बुलाने पर अदालत ने तीन हजार रुपये की लागत लगाई और जिरह पूरी करने का अंतिम मौका दिया।

ट्रायल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अदालत ने समय-समय पर कई सख्त कदम उठाए हैं। जनवरी 2025 में कोर्ट ने याद दिलाया कि श्रद्धा वॉकर हत्याकांड फास्ट ट्रैक अदालत में लंबित है और मुख्य वकील की दूसरी अदालत में व्यस्तता सुनवाई रोकने का उचित आधार नहीं बन सकती। अक्टूबर 2025 में अदालत ने सभी पक्षों से तारीखें मांगीं, ताकि मामले की रोजाना सुनवाई सुनिश्चित की जा सके। दिसंबर में कोर्ट ने जनवरी से अप्रैल 2026 तक पूरा ब्लॉक कैलेंडर जारी किया और इस दौरान कुल 17 सुनवाई की तारीखें तय कीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन तारीखों पर स्थगन की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।

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