अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद गैंगस्टर सचिन थापन की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, वह पिछले 17-18 दिनों से भोजन नहीं कर रहा है। हालांकि, जेल प्रशासन ने इस मामले में अलग जानकारी दी है। जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ के अनुसार, सचिन ने नवरात्रों का हवाला देते हुए खुद को मौन व्रत पर बताया था। उसने अपनी मांगों को लेकर कोई लिखित आवेदन भी नहीं दिया। फिलहाल, अस्पताल के डॉक्टर उसकी सेहत पर नजर रख रहे हैं। हालांकि, इलाज कराने से इनकार करने के कारण चिकित्सकों के सामने चुनौती बनी हुई है।
अस्पताल में भर्ती सचिन थापन, इलाज से इनकार
सचिन थापन की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में लाया गया। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अमित यादव ने बताया कि लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उसकी हालत बिगड़ी है। डॉक्टरों के मुताबिक, सचिन इलाज कराने से भी इनकार कर रहा है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी संबंधित उच्चाधिकारियों को दे दी है। साथ ही, जेल प्रशासन के सहयोग से उसका इलाज शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भांजा है। वह पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में प्रमुख आरोपियों में शामिल है। पुलिस जांच में उस पर हत्याकांड से पहले रेकी करने और शूटरों को जरूरी मदद मुहैया कराने के आरोप लगे थे।
जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ के मुताबिक, सचिन ने नवरात्रों का व्रत शुरू होने से दो दिन पहले एक मौखिक मांग रखी थी। वह चाहता था कि हाई सिक्योरिटी जेल में बंद उसके दो साथियों को भी उसकी बैरक में रखा जाए। हालांकि, उसने इस मांग को लेकर कोई लिखित प्रार्थना पत्र नहीं दिया। जेल अधिकारियों के अनुसार, सचिन ने बाद में खुद को मौन व्रत पर बताया। इस वजह से वह अधिकारियों से अपनी बात विस्तार से नहीं रख रहा था। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने उसके लंबे समय से भोजन नहीं करने की जानकारी दी है। ऐसे में उसके स्वास्थ्य और जेल में चल रही गतिविधियों को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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साथियों को एक ही बैरक में रखने की मांग पर विवाद
जेल प्रशासन के मुताबिक, सचिन जिन दो कैदियों को अपनी बैरक में रखने की मांग कर रहा था, वे भी अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं। आरोप है कि इन दोनों कैदियों ने हाल ही में अपनी बैरक में लगे सीसीटीवी कैमरे और टाइल्स तोड़ दिए थे। इस घटना के बाद जेल प्रशासन ने उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनहीनता के मामलों में कार्रवाई का सामना कर रहे इन कैदियों को सचिन के साथ एक ही बैरक में रखना सुरक्षा नियमों के खिलाफ होगा। इसलिए जेल प्रशासन उसकी मौखिक मांग स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, इस संबंध में सचिन की ओर से कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है।
सचिन थापन की तबीयत बिगड़ने के बाद अब उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, डॉक्टर उसका इलाज शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह उपचार लेने से इनकार कर रहा है। वहीं, जेल प्रशासन का कहना है कि उसने अपनी मांगों को औपचारिक रूप से दर्ज नहीं कराया है। इस मामले में भूख हड़ताल और मौन व्रत को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। जेल प्रशासन के बयान के अनुसार, सचिन ने नवरात्रों के दौरान मौन व्रत रखने की बात कही थी। फिलहाल, अस्पताल में उसकी सेहत पर नजर रखी जा रही है। आगे की स्थिति उसके स्वास्थ्य और इलाज को लेकर होने वाले फैसलों पर निर्भर करेगी।


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