दिल्ली की सड़कों पर एक युवक की मौत ने सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया। सोमवार रात घर लौटते समय कमल एक खुले गड्ढे में गिर गया और उसकी जान चली गई, जबकि उसके पिता और परिवार पूरी रात उसे ढूंढते रहे। परिजन छह थानों के दरवाजे खटखटाते रहे, लेकिन कहीं भी तत्काल मदद नहीं मिली। सवाल पूछे गए, शक जताया गया, मगर कार्रवाई नहीं हुई। सुबह जब पुलिस का फोन आया, तब तक कमल की मौत हो चुकी थी। यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उस पूरी रात की कहानी है, जब सिस्टम ने एक परिवार की गुहार नहीं सुनी।
रोज़ का रास्ता, आख़िरी कॉल और बढ़ती बेचैनी
कमल रोहिणी स्थित एक बैंक कॉल सेंटर में काम करता था और पिछले तीन वर्षों से उसकी दिनचर्या एक जैसी थी। वह रोज उसी रास्ते और उसी समय पर घर लौटता था। सोमवार रात करीब 11:53 बजे उसने घरवालों को फोन कर बताया कि वह डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच गया है और 15 मिनट में घर आ जाएगा। लेकिन वह कभी घर नहीं पहुंचा। बार-बार फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। यहीं से परिवार की बेचैनी शुरू हुई, जो धीरे-धीरे डर, गुस्से और बेबसी में बदलती चली गई।
परिजन और दोस्त तुरंत उसकी तलाश में निकल पड़े। उन्होंने संभावित रास्तों, चौराहों, पार्कों और अंधे मोड़ों पर खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद वे पुलिस थानों पहुंचे। परिवार का आरोप है कि जनकपुरी थाने में गुमशुदगी दर्ज करने से मना कर दिया गया और 24 घंटे पूरे होने की बात कही गई। मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने की मांग पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। परिवार का कहना है कि पुलिस ने लोकेशन बताने से इनकार किया और सिर्फ इतना कहा कि फोन किसी पार्क के आसपास 200 मीटर के दायरे में है।
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रातभर थानों में भटके परिजन, न FIR हुई न सुनी गई शिकायत
रात भर परिजन जनकपुरी, विकासपुरी, रोहिणी, रोहिणी सेक्टर-10, डी-ब्लॉक और डाबड़ी समेत छह थानों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कहीं FIR दर्ज नहीं हुई। हर जगह वही सवाल पूछे गए और वही जवाब मिले—सुबह देखेंगे, रात हो गई है। परिवार को सबसे ज्यादा ठेस उस वक्त लगी, जब उनसे यह पूछा गया कि कहीं लड़का नशे में तो नहीं था। परिजन लगातार कहते रहे कि कमल नशे से दूर रहता था, फिर भी शक उसी पर किया गया।
परिवार का आरोप है कि सागरपुर थाने में पुलिस ने बेहद असंवेदनशील जवाब दिया और कहा कि ऐसा रोज होता है, लड़के रोज गायब होते हैं। वहां सिर्फ नाम, बाइक नंबर, मोबाइल नंबर और फोटो लेकर व्हाट्सएप ग्रुप में डालने की बात कही गई। पूरी रात की भटकन के बाद सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस ने फोन कर एक्सीडेंट की सूचना दी। मौके पर पहुंचने पर परिजनों ने देखा कि कमल अपनी बाइक के साथ एक खुले और बिना बैरिकेडिंग वाले गड्ढे में पड़ा था, जो काफी समय से खुला बताया जा रहा है।
परिवार इस मौत को सिर्फ हादसा मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि अगर सड़क खुदी थी तो उसे ठीक से क्यों नहीं घेरा गया और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि हत्या कर शव को गड्ढे में फेंका गया हो सकता है। वहीं पुलिस का दावा है कि उसने पूरी रात खोजबीन की और सुबह एक PCR कॉल के बाद शव बरामद किया। दिल्ली जल बोर्ड ने भी शोक जताते हुए जांच का आश्वासन दिया है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या दिल्ली की सड़कों और सिस्टम पर आम नागरिक की जान वाकई सुरक्षित है।
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