बांग्लादेश के ढाका कोर्ट ने इस्कॉन पर बैन लगाने की मांग को खारिज कर दिया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने बताया कि इस्कॉन की गतिविधियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए गए हैं और यह मुद्दा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सरकार ने बताया कि इस्कॉन मामले में अब तक 3 मामले दर्ज किए गए हैं और 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, सेना को देश में किसी भी अशांति को रोकने के लिए तैनात किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का निर्णय होगा। इस्कॉन मंदिर के प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की राजद्रोह में गिरफ्तारी के बाद विवाद बढ़ा है, जिसके चलते बांग्लादेश में हिंसा हुई और बांग्लादेश-भारत संबंधों में तनाव आ गया।
26 नवंबर को इस्कॉन प्रमुख की जमानत खारिज होने के बाद हिंसा में वकील सैफुल इस्लाम की मौत हुई।
वकील ने याचिका में सैफुल इस्लाम की हत्या में इस्कॉन का हाथ बताते हुए बैन और इमरजेंसी की मांग की।
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चिन्मय प्रभु ने बांग्लादेश में सनातन जागरण मंच बनाया
5 अगस्त 2024 को पीएम हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा बढ़ी।
सनातन जागरण मंच बांग्लादेशी हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए बना, जिसका प्रवक्ता चिन्मय प्रभु थे।
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क्यों गिरफ्तार हुए चिन्मय प्रभु
25 अक्टूबर को चटगांव में सनातन जागरण मंच की रैली में भगवा ध्वज पर ‘आमी सनातनी’ लिखा था।
31 अक्टूबर को BNP नेता फिरोज खान ने चिन्मय कृष्ण दास और 19 अन्य पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान आरोपित किया।
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