उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में 26 वर्षीय निखिल वर्मा ने सुसाइड कर ली। वह डाक विभाग में असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत था। पुलिस ने उसका शव घर से लगभग 200 मीटर दूर एक कमरे में बरामद किया। वह गमछे के सहारे फांसी के फंदे से लटका मिला। घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अधिकारियों पर गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मामला कार्यस्थल तनाव से जुड़ा पाया गया। स्थानीय लोग भी घटना को लेकर स्तब्ध रह गए। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूछताछ शुरू की। यह घटना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
नौकरी के दबाव और आरोपों से जुड़ा मामला
पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान निखिल की जेब से तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला था। निखिल ने उस नोट में विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसने डाक अधीक्षक एस.के. शुक्ला और मेल ओवरसियर श्याम तिवारी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। निखिल ने लिखा कि अधिकारी उससे लगातार पैसे मांगते थे और नौकरी से हटाने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। उसने अपने नोट में बताया कि वह लगातार दबाव और तनाव के कारण पूरी तरह टूट चुका था। निखिल ने परिवार से अपील की कि बिना न्याय मिले उसका अंतिम संस्कार नहीं किया जाए। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी
सुसाइड नोट, परिवार का आक्रोश और जांच
सुसाइड नोट में निखिल ने अपनी आखिरी इच्छा भी लिखी। उसने कहा कि उसकी जगह किसी को नौकरी न दी जाए। उसने परिवार से अपने छोटे भाई-बहनों का ध्यान रखने को कहा। उसने यह भी लिखा कि उसकी मौत की वजह केवल नौकरी का दबाव है। उसने विभागीय सिस्टम की तारीफ करते हुए कुछ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। परिजनों ने आरोप लगाया कि दबाव, प्रताड़ना से वह टूट गया था। पुलिस ने समझाने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन्होंने आरोपित अधिकारियों की गिरफ्तारी तक पोस्टमार्टम रोकने की मांग की। बाद में करीब 10 घंटे के बाद पोस्टमार्टम कराया गया। घटना से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और डाक विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। सहकर्मियों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। विभागीय स्तर पर भी जांच कमेटी गठित की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि सुसाइड नोट की सत्यता की जांच की जाएगी। ग्रामीणों ने परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। यह मामला कार्यस्थल उत्पीड़न और मानसिक तनाव को उजागर करता है। प्रशासन ने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। यह घटना नौकरी के दबाव और सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाती है।


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