दाइयां, जैसे सिरो देवी, पर नवजात बच्चियों की हत्या का भारी दबाव था, खासकर बिहार के कटिहार जिले में। मैंने 1996 में सिरो देवी और अन्य दाइयों का इंटरव्यू लिया था, जब एक एनजीओ ने खुलासा किया कि ये दाइयां माता-पिता के दबाव में बच्चियों की हत्या कर रही थीं, आमतौर पर केमिकल चटा कर या गर्दन मरोड़ कर।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में उस समय 5 लाख से अधिक दाइयां काम कर रही थीं और शिशु हत्या सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं थी। हकिया देवी ने बताया कि दाइयां नवजात बच्चियों की हत्या का आदेश मानने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थीं। परिवार दहेज के कारण बर्बादी का डर दिखाकर दबाव डालते थे, और दाइयां डर और धमकियों के चलते विरोध नहीं कर पाती थीं।
Also Read : रूस-यूक्रेन और इस्राइल-हमास संघर्ष पर ट्रंप-हैरिस के बीच जोरदार बहस
दहेज लेन-देन की प्रथा को 1961 में गैर-क़ानूनी बना दिया गया
दाइयां अपनी मां और दादी से काम सीखती थीं, और ऊंची जाति के परिवारों के आदेश का पालन करती थीं।
दहेज में नकदी, गहने, बर्तन आदि कुछ भी हो सकता है, और अमीर या गरीब परिवारों के लिए दहेज शादी की अनिवार्य शर्त होती है। इसी कारण, बेटे का जन्म खुशी और बेटी का जन्म आर्थिक बोझ माना जाता है। सिरो देवी, जिनका मैंने इंटरव्यू किया था और जो अब भी जीवित हैं, ने लड़के और लड़की के बीच इस असमानता को समझाने के लिए एक उदाहरण पेश किया।
Also Read : राष्ट्रपति शासन को लेकर भाजपा और आप के बीच बहस हो रही तीखी
उन दाइयों ने उन परिवारों के कम से पांच नवजात बच्चियों को बचाया
1996 तक, दाइयों ने बच्चियों की हत्या का विरोध करना शुरू कर दिया था, प्रेरित होकर सामाजिक कार्यकर्ता अनिला कुमारी के प्रयासों से। अनिला का सवाल, “क्या तुम अपनी बेटी के साथ भी यही करोगी?” ने दाइयों की सोच बदल दी। 2007 में, सिरो देवी ने कहा कि अब यदि कोई बच्ची मारने को कहता है, तो वह जवाब देती हैं, “बच्ची मुझे दे दो, मैं उसे अनिला मैडम के पास ले जाऊंगी।”
Also Read : कांग्रेस से अलग होकर मुफ्ती मोहम्मद सईद ने पीडीपी का किया गठन


More Stories
Nuclear Power Operator to Set Up New Design Unit to Back Private Sector Projects
फर्जी IAS तृप्ति राजपूत पर शिकंजा, ससुराल से मिले ट्रेनिंग अफसर के मोमेंटो और ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा जब्त
Cyber Cell Honours Samay Raina as Comedian Jokes About Latent Controversy With CM