लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। एएनटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त टीम ने नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। टीम ने 9.60 लाख एल्प्राजोलाम टैबलेट बरामद कीं। इसके अलावा 1.20 लाख ट्रामाडोल कैप्सूल भी मिले। 720 बोतल कोडीनयुक्त कफ सिरप भी जब्त किया गया। बरामद दवाओं का कुल वजन करीब 228 किलोग्राम बताया गया है।
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डिलीवरी से पहले टीम ने पकड़ी दवाओं की खेप
एएनटीएफ को ट्रांसपोर्ट नगर में बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने 3 सितंबर को इलाके में निगरानी शुरू की। निगरानी के दौरान तीन लोग संदिग्ध तरीके से कार्टून बोरियों में छिपाते दिखे। टीम ने मौके पर पहुंचकर उनकी तलाशी ली। आरोपियों की पहचान किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के रूप में हुई। उनके पास से भारी मात्रा में नशीली दवाएं मिलीं। एफएसडीए के अधिकारियों ने दवाओं के नमूने भी जांच के लिए लिए।
पूछताछ में आरोपियों ने दवाओं की सप्लाई से जुड़ी अहम जानकारी दी। किशन और समीर ने उमेश कुमार से दवाएं लेने की बात बताई। इसके बाद टीम ने उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया। जांच में सतेन्द्र की फर्म के दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आई। कथित तौर पर इन्हीं दस्तावेजों से दवाओं की बिलिंग की जाती थी। इसके बदले सतेन्द्र को कमीशन मिलने की जानकारी सामने आई। एफएसडीए जांच में कन्हैया फार्मा से सात प्रकार की दवाएं मिलीं। रिकॉर्ड नहीं मिलने पर फर्म को सील कर दिया गया।
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छह आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई
जांच आगे बढ़ने पर नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम भी सामने आए। शाद इरशाद से पूछताछ में विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। टीम ने बाद में विशाल को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने शाद को दवाएं उपलब्ध कराने की बात कही। विशाल का दवा लाइसेंस पहले ही निरस्त हो चुका था। उसके खिलाफ कोडीन से जुड़े मामले में एफआईआर भी दर्ज थी। इसके बाद वह दूसरी फर्मों के जरिए कारोबार करने लगा। उसने कोडीनयुक्त सिरप बृजेश वर्मा से खरीदने की जानकारी दी।
एएनटीएफ के अनुसार सभी छह आरोपी कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़े थे। गिरफ्तार आरोपियों में किशन, समीर, शाद, उमेश, सतेन्द्र और विशाल शामिल हैं। उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई है। टीम ने सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी बरामद किए। बरामद दवाओं के नमूने नियमानुसार अदालत के सामने पेश किए जाएंगे। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। इसके लिए ई-साक्ष्य एप का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियां अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।
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