kanpur की एसीजेएम कोर्ट ने दिव्यांशी चौधरी को रिमांड न मिलने पर बेल दे दी। पुलिस ने चार शादियों वाली कथित लुटेरी दुल्हन पर गंभीर आरोप लगाकर रिमांड मांगी थी। कोर्ट ने पुलिस की आठ दिन की रिमांड अर्जी खारिज कर दी। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपों और अनुमानों से किसी को हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने दिव्यांशी को पर्सनल बॉन्ड पर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस की जल्दबाजी और कमजोर सबूतों के कारण कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। इस फैसले से कानपुर पुलिस की किरकिरी हुई। नागरिक और मीडिया इस फैसले को बड़े ध्यान से देख रहे हैं। दिव्यांशी ने कोर्ट के बाद मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने अपने आप को पूरी तरह निर्दोष बताया।
Also Read: IND vs SA: कप्तान शुभमन गिल सिर्फ 3 गेंद खेलने के बाद अचानक लौटे हुए रिटायर्ड हर्ट
kanpur: पुलिस ने लगाए थे गंभीर आरोप
kanpur पुलिस ने दिव्यांशी पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी के कुल बारह धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने रिमांड में आठ धाराओं का हवाला देकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाने का दावा किया। आरोपों में जबरन वसूली और विश्वासघात भी शामिल थे। पुलिस ने केस को फेक रेप-एक्सटॉर्शन रैकेट के रूप में पेश किया। आरोपों के मुताबिक दिव्यांशी शादी का झांसा देकर अमीर लोगों को निशाना बनाती थी। पुलिस ने कहा कि शादी के बाद पीड़ितों से पैसे वसूले जाते थे। जांच में पुलिस ने तकनीकी और दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए। कोर्ट ने पुलिस की सबूतहीन दलीलों को आधारहीन करार दिया। पुलिस को अब ठोस सबूत के बिना रिमांड मिलना असंभव हो गया।
दिव्यांशी के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश भसीन और टीम ने तर्क दिया। कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों को मान्यता दी। न्यायाधीश ने कहा कि बिना दस्तावेज़ और तकनीकी प्रमाण के रिमांड अस्वीकार्य है। कोर्ट ने दिव्यांशी को पूरी सहयोग की चेतावनी भी दी। वकीलों ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी देर रात की थी। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि रात में रिमांड प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। पुलिस का दांव उल्टा पड़ गया और आरोपी तुरंत रिहा हो गई।
Also Read: Bihar Election 2025: छपरा से खेसारी लाल यादव को हराने वाली महिला नेता और उनकी जीत का अंतर
कोर्ट ने पुलिस की प्रक्रिया पर टिप्पणी की
कोर्ट ने पुलिस के देर रात आवेदन को आधारहीन बताया। न्यायाधीश ने कहा कि रिमांड के लिए सबूत आवश्यक हैं। पुलिस ने आरोपी को 12 बजे गिरफ्तार किया, लेकिन रिमांड शाम को मांगी। अदालत ने कहा कि बिना तैयारी रिमांड मांगना अनुचित है। पुलिस की जल्दबाजी कोर्ट में उलटी पड़ गई। दिव्यांशी को पर्सनल बॉन्ड पर तुरंत रिहा किया गया। कोर्ट ने कहा कि जांच में सहयोग देना अनिवार्य है। अदालत ने चेताया कि गवाहों पर दबाव न डाले। पुलिस को अब ठोस सबूतों के साथ फिर से आवेदन करना होगा। कोर्ट ने कहा कि आरोपों पर केवल अनुमान नहीं चलेगा।
दिव्यांशी ने मीडिया के सामने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उनकी चार शादियां नहीं हुईं। उन्होंने अपने पति पर झूठा मामला दर्ज कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सभी आरोप निराधार हैं। मीडिया ने उनकी प्रतिक्रिया को बड़े ध्यान से कवर किया। वकीलों ने पुलिस की कमजोर तैयारी की भी बात कही। कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस को चुनौती बढ़ गई। पुलिस अब दोबारा ठोस सबूत लेकर रिमांड मांग सकती है। केस के अगले कदम पर सबकी नजर लगी है। कानपुर पुलिस अब जांच को मजबूत तरीके से आगे बढ़ाएगी।
Also Read: IND vs SA: कप्तान शुभमन गिल सिर्फ 3 गेंद खेलने के बाद अचानक लौटे हुए रिटायर्ड हर्ट


More Stories
Delhi: Woman Biker Harassed, Chased by Two Men in Hauz Khas
UAE: शारजाह में भारतीय व्यक्ति की हत्या, कार से 9 टुकड़ों में मिला शव
IIT Bombay Professor Suryanarayana Doolla, Named in Student Suicide Controversy, Sent on Leave